भारत के आधुनिक कर्ण एक साल में हजारों करोड़ का दान, जानें कौन हैं देश के सबसे बड़े दानवीर
News India Live, Digital Desk: भारत में दान (Giving) का चलन केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत स्तर पर सामाजिक सुधार के लिए बड़ी राशि दी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में परोपकारी कार्यों के लिए दिया जाने वाला कुल दान अब ₹1 लाख करोड़ के आंकड़े को छू रहा है।
1. भारत के शीर्ष 3 दानवीर (Top Donors)
| नाम | कंपनी | औसत वार्षिक दान (लगभग) | मुख्य क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| शिव नाडर | HCL | ₹2,042 करोड़ | शिक्षा और कला |
| अज़ीम प्रेमजी | विप्रो | ₹1,774 करोड़ | प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य |
| मुकेश अंबानी | रिलायंस | ₹407 करोड़ | आपदा राहत और शिक्षा |
2. रिपोर्ट की मुख्य बातें (Key Highlights)
घरेलू दान में वृद्धि: भारत में विदेशी फंडिंग (FCRA) पर कड़ाई के बाद 'घरेलू दान' (Domestic Giving) में भारी उछाल आया है। अब भारत के विकास में भारतीयों का पैसा ही ज्यादा लग रहा है।
अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ (UHNI) का योगदान: देश के सबसे अमीर लोग अपनी कुल संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए दान कर रहे हैं।
मध्यम वर्ग का 'छोटा लेकिन बड़ा' दान: रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत छोटे दान (Retail Giving) का कुल योगदान भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें ऑनलाइन डोनेशन प्लेटफॉर्म्स ने बड़ी भूमिका निभाई है।
3. 'कर्ण' क्यों कहा गया?
रिपोर्ट में इन व्यवसायियों की तुलना महाभारत के 'दानवीर कर्ण' से इसलिए की गई है क्योंकि:
निस्वार्थ योगदान: इनका दान केवल सीएसआर (CSR) की कानूनी बाध्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि ये अपनी निजी संपत्ति का बड़ा हिस्सा ट्रस्टों को दे रहे हैं।
शिक्षा पर फोकस: शिव नाडर और अज़ीम प्रेमजी जैसे दानवीर देश के ग्रामीण इलाकों में विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
4. दान देने के बदलते क्षेत्र
पहले जहाँ अधिकांश दान मंदिरों या धार्मिक संस्थाओं को जाता था, अब रुझान बदला है:
स्वास्थ्य: कैंसर अनुसंधान और अस्पतालों के लिए बड़े फंड।
पर्यावरण: जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण के लिए बढ़ती फंडिंग।
लैंगिक समानता: महिलाओं के कौशल विकास और सुरक्षा के लिए विशेष निवेश।