रेल यात्रियों के लिए गुड न्यूज अब सेकंड चार्ट बनने तक बदल सकेंगे बोर्डिंग पॉइंट जानें रेलवे का नया प्लान
News India Live, Digital Desk : अक्सर यात्रियों को ऐन वक्त पर अपना सफर किसी दूसरे स्टेशन से शुरू करना पड़ता है, लेकिन मौजूदा नियमों की जटिलता के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब रेलवे इस प्रक्रिया को और भी लचीला बनाने जा रहा है।
1. क्या है नया प्रस्तावित नियम?
वर्तमान में, यदि आप अपना बोर्डिंग स्टेशन बदलना चाहते हैं, तो आपको ट्रेन छूटने से कम से कम 24 घंटे पहले ऑनलाइन या काउंटर पर आवेदन करना होता है। लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार:
सेकंड चार्ट तक सुविधा: अब यात्री ट्रेन के प्रस्थान से पहले दूसरा चार्ट (Second Chart) तैयार होने तक अपना बोर्डिंग पॉइंट बदल सकेंगे।
समय सीमा: दूसरा चार्ट आमतौर पर ट्रेन छूटने से 30 मिनट से 2 घंटे पहले तैयार होता है। यानी अब आप सफर शुरू होने के कुछ समय पहले तक अपना स्टेशन बदल पाएंगे।
2. यात्रियों को क्या होगा फायदा?
टिकट कैंसिल करने की जरूरत नहीं: कई बार यात्री मुख्य स्टेशन के बजाय अपने नजदीकी स्टेशन से ट्रेन पकड़ना चाहते हैं। इस नियम से उन्हें अंतिम समय में टिकट रद्द करने या TTE द्वारा सीट खाली घोषित करने का डर नहीं रहेगा।
कनेक्टिंग ट्रेन में आसानी: यदि किसी यात्री की पिछली ट्रेन लेट हो गई है, तो वह तुरंत अगली ट्रेन का बोर्डिंग पॉइंट आगे के किसी स्टेशन पर शिफ्ट कर सकेगा।
बिना जुर्माने का सफर: अगर आप बिना बोर्डिंग पॉइंट बदले किसी दूसरे स्टेशन से ट्रेन पकड़ते हैं, तो रेलवे नियमों के तहत आपसे जुर्माना वसूला जा सकता है। नया नियम इस समस्या को खत्म कर देगा।
3. बोर्डिंग पॉइंट बदलने के मौजूदा नियम (वर्तमान स्थिति)
जब तक नया नियम पूरी तरह लागू नहीं होता, तब तक आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
एक बार बदलाव: आप अपने टिकट पर बोर्डिंग स्टेशन केवल एक बार ही बदल सकते हैं।
सीट का अधिकार: एक बार बोर्डिंग पॉइंट बदल लेने पर आप पुराने स्टेशन से ट्रेन पकड़ने का अधिकार खो देते हैं। यदि आप वहां से चढ़ते पाए गए, तो आपको बिना टिकट माना जा सकता है।
ऑनलाइन प्रक्रिया: IRCTC की वेबसाइट पर 'Booked Ticket History' में जाकर बोर्डिंग पॉइंट बदलने का विकल्प मिलता है।
4. कब से लागू होगी यह सुविधा?
सूत्रों के अनुसार, रेलवे बोर्ड इस प्रस्ताव पर अंतिम चर्चा कर रहा है। इसे पहले कुछ प्रीमियम ट्रेनों (जैसे राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत) में 'पायलट प्रोजेक्ट' के तौर पर शुरू किया जा सकता है और फिर इसे सभी एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए लागू किया जाएगा।