ऑस्ट्रेलिया जाने वाले भारतीय छात्रों को बड़ा झटका: स्टूडेंट वीजा नियमों में भारी सख्ती, 'हाई रिस्क' कैटेगरी में आया भारत
नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए एक चुनौतीपूर्ण खबर सामने आई है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपनी वीजा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय छात्रों के लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (दस्तावेज जांच) के स्तर को बढ़ा दिया है। अब भारत से जाने वाले छात्र वीजा के मामले में 'लेवल 2' के बजाय 'लेवल 3' (Highest Risk) की श्रेणी में रखे जाएंगे।
यह नया नियम 8 जनवरी 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू कर दिया गया है, जिसका सीधा असर उन हजारों छात्रों पर पड़ेगा जो वर्तमान में वीजा प्रक्रिया के बीच में हैं।
क्या बदल गया है 'लेवल 3' होने से?
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने सितंबर 2025 से पहले वाले कड़े नियमों को फिर से बहाल कर दिया है। लेवल 3 की श्रेणी में आने के बाद छात्रों को इन चुनौतियों का सामना करना होगा:
अतिरिक्त दस्तावेज: अब छात्रों को अपनी आर्थिक स्थिति और शैक्षणिक योग्यता साबित करने के लिए पहले से कहीं ज्यादा कागजात जमा करने होंगे।
सख्त जांच: दूतावास द्वारा फंड्स के स्रोत (Source of Funds) और छात्र की वास्तविक मंशा (GTE - Genuine Temporary Entrant) की गहराई से पड़ताल की जाएगी।
प्रोसेसिंग टाइम: नियमों में सख्ती के कारण वीजा मिलने के समय में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
राज्यसभा में सरकार का जवाब
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में इस बदलाव की पुष्टि की। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद को बताया कि भारत को अब स्टूडेंट वीजा के लिए 'हाईएस्ट रिस्क' कैटेगरी में डाल दिया गया है।
हालांकि, उन्होंने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कुछ सकारात्मक बिंदु भी साझा किए:
मजबूत रिश्ते: नियमों में सख्ती के बावजूद भारत और ऑस्ट्रेलिया के शैक्षिक संबंध प्रगाढ़ हैं।
विदेशी कैंपस: ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख यूनिवर्सिटीज भारत में अपने कैंपस खोल रही हैं, जिससे छात्रों को घर के पास ही अंतरराष्ट्रीय शिक्षा मिल सकेगी।
कूटनीतिक प्रयास: भारत सरकार लगातार ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के संपर्क में है ताकि भारतीय छात्रों के लिए यात्रा और अध्ययन की प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके।
छात्रों के लिए सलाह
यदि आप 2026 के इनटेक (Intake) के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
फंड्स का प्रमाण: अपने बैंक स्टेटमेंट्स और स्पॉन्सरशिप के कागजात पूरी तरह स्पष्ट और पुराने रखें।
कोर्स का चयन: अपने पिछले बैकग्राउंड से मेल खाने वाले कोर्स का ही चुनाव करें, ताकि 'जेनुइन स्टूडेंट' होने पर कोई सवाल न उठे।
जल्द आवेदन: नई सख्ती को देखते हुए आखिरी समय का इंतजार न करें और पर्याप्त समय हाथ में लेकर आवेदन करें।