बिहार के रोड नेटवर्क को लगा बड़ा झटका केंद्र ने 3 मेगा सड़क परियोजनाओं को नहीं दी मंजूरी, नीतीश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट

Post

News India Live, Digital Desk: बिहार में बेहतर कनेक्टिविटी का सपना देख रहे लोगों के लिए एक निराश करने वाली खबर है। केंद्र सरकार ने बिहार की तीन बड़ी सड़क परियोजनाओं को फिलहाल मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। इन प्रोजेक्ट्स के अटकने से न केवल यातायात सुगम बनाने की योजना प्रभावित हुई है, बल्कि इनके बजट और निर्माण की समय-सीमा पर भी सवालिया निशान लग गए हैं।

कौन सी हैं वो 3 प्रमुख परियोजनाएं?

केंद्र की ओर से जिन प्रोजेक्ट्स पर आपत्ति जताई गई है या जिन्हें फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, उनमें ये शामिल हैं:

पटना-गया-डोभी फोरलेन का विस्तार: राजधानी को झारखंड सीमा से जोड़ने वाली इस महत्वपूर्ण सड़क के कुछ हिस्सों के चौड़ीकरण का प्रस्ताव था।

हाजीपुर-मुजफ्फरपुर कॉरिडोर: उत्तर बिहार की लाइफलाइन मानी जाने वाली इस सड़क के सुदृढ़ीकरण की योजना थी।

सीमांचल की एक प्रमुख लिंक रोड: जो सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।

क्यों फंसा पेंच? केंद्र ने बताए ये 3 बड़े कारण

सूत्रों के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इन परियोजनाओं को हरी झंडी न देने के पीछे निम्नलिखित तर्क दिए हैं:

भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition): कई हिस्सों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होना और किसानों के मुआवजे से जुड़े विवाद सबसे बड़ी बाधा हैं।

फंडिंग और डीपीआर (DPR) में कमियां: केंद्र का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में कुछ तकनीकी और वित्तीय स्पष्टता की कमी है।

पर्यावरण क्लियरेंस: कुछ सड़कों का हिस्सा वन क्षेत्र या संवेदनशील इलाकों से गुजर रहा है, जिसके लिए जरूरी एनओसी (NOC) अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

नीतीश सरकार की अगली रणनीति क्या होगी?

बिहार के पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे केंद्र की आपत्तियों का अध्ययन कर रहे हैं। राज्य सरकार की कोशिश है कि जल्द से जल्द संशोधित प्रस्ताव भेजकर इन प्रोजेक्ट्स को दोबारा पटरी पर लाया जाए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए।

इन सड़कों के निर्माण से न केवल बिहार के भीतर बल्कि पड़ोसी राज्यों के साथ भी व्यापार और आवाजाही आसान होनी थी। अब देखना यह होगा कि राज्य और केंद्र के बीच यह तालमेल कब तक बैठ पाता है।