अमीर होना कानून से बचने का लाइसेंस नहीं, कोर्ट रूम में जब चीफ जस्टिस ने बड़े लोगों को दिखाई उनकी असल जगह
News India Live, Digital Desk: हमारे देश में अक्सर एक बात कही जाती है कि 'कानून की लाठी बेआवाज़ होती है', लेकिन क्या वह लाठी अमीरों और गरीबों पर एक समान चलती है? अक्सर लोग कहते हैं कि पैसा हो तो इंसाफ को टाला जा सकता है या बड़े वकील करके सिस्टम को उलझाया जा सकता है। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इस धारणा पर जो कड़ा प्रहार किया है, वह सुनने और समझने लायक है।
अदालत की नाराजगी की वजह क्या है?
मुख्य न्यायाधीश ने बहुत ही साफ शब्दों में कहा कि जो लोग आर्थिक रूप से संपन्न हैं, वे अक्सर कानून को चुनौती देने की कोशिश करते हैं। उनका इशारा उन रसूखदारों की तरफ था जो किसी न किसी बहाने से ट्रायल (मुकदमे) को टालने या उसमें बाधा डालने के लिए देश की सबसे बड़ी अदालत तक खिंचे चले आते हैं।
CJI ने कहा कि "अमीरों को भी ठीक उसी तरह ट्रायल का सामना करना चाहिए जैसे एक साधारण इंसान करता है।" उनका मानना है कि सिर्फ इसलिए कि किसी के पास संसाधन हैं या वह महंगे से महंगे वकीलों की फौज खड़ी कर सकता है, उसे कानूनी प्रक्रिया में कोई 'स्पेशल पास' नहीं मिल जाना चाहिए।
इंसाफ में देरी, मतलब इंसाफ से इनकार
अदालत में चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि रसूखदार लोग कानून की पेचीदगियों का फायदा उठाकर बरसों तक फैसले को लटकवा देते हैं। इससे न केवल पीड़ित को न्याय मिलने में देरी होती है, बल्कि न्यायपालिका पर भी दबाव बढ़ता है। चीफ जस्टिस की ये बातें उस सिस्टम पर एक आईना हैं जहाँ कभी-कभी पद और पैसा, योग्यता और सच्चाई पर हावी होने लगते हैं।
एक समान व्यवस्था की मांग
संविधान की किताब में तो लिखा है कि कानून की नज़र में सब बराबर हैं, लेकिन इसे जमीन पर उतारना एक बड़ी चुनौती रही है। मुख्य न्यायाधीश का यह 'ब्लंट' यानी बेबाक अंदाज इस बात का संकेत है कि अब न्यायपालिका इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी। संदेश बहुत सीधा है—यदि आपने कुछ गलत किया है, तो चाहे आप कितने ही बड़े कारोबारी हों या ताकतवर नेता, आपको अदालती कटघरे में एक सामान्य नागरिक की तरह ही खड़ा होना पड़ेगा।
हम सबके लिए यह क्यों जरूरी है?
यह सिर्फ कानूनी खबर नहीं है, बल्कि एक उम्मीद है। उस आम आदमी के लिए उम्मीद, जो अपनी पूरी जिंदगी अदालत के चक्कर काटने में लगा देता है, जबकि ताकतवर लोग चंद मिनटों में कानूनी खामियों का फायदा उठा लेते हैं। CJI का यह स्टैंड समाज में न्याय के प्रति विश्वास को दोबारा जगाने की कोशिश है।
इस पूरे मामले पर आपकी क्या सोच है? क्या आपको लगता है कि वाकई बड़े लोगों के लिए कानून का चेहरा बदल जाता है? कमेंट में अपनी राय हमें जरूर बताएं।