कलयुग का खौफनाक चेहरा ,नारद पुराण की वो भविष्यवाणियाँ, जिन्हें सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी

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News India Live, Digital Desk : हजारों साल पहले, जब ऋषि-मुनि शांति और अध्यात्म के चरम पर थे, तब 'नारद पुराण' में कलयुग की एक ऐसी डरावनी तस्वीर खींची गई थी जिसे आज अगर आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर देखें, तो लगेगा कि वो बातें किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं बल्कि आज की कड़वी हकीकत हैं।

इंसानी रिश्तों का 'बाजार' बन जाएगा संसार
नारद पुराण के मुताबिक, कलयुग का सबसे बड़ा असर इंसान के व्यवहार पर होगा। यहाँ धर्म का मतलब सिर्फ दिखावा रह जाएगा। लोग सच बोलने के बजाय झूठ के सहारे अपनी दुनिया बसाएंगे। रिश्ते सिर्फ मतलब की बुनियाद पर टिकेंगे। भाई-भाई का खून बहाएगा और बेटा अपने माता-पिता की इज्जत करना भूल जाएगा। हैरानी की बात तो यह है कि उस दौर में प्रेम का पैमाना निस्वार्थ भाव नहीं, बल्कि शारीरिक सुख और पैसा होगा।

जब रक्षक ही बन जाएंगे भक्षक!
आजकल हम खबरों में भ्रष्टाचार और अपराध की कहानियाँ पढ़ते हैं। नारद पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि कलयुग में 'राजा' (आज के दौर के नेता और सत्ताधारी) प्रजा की रक्षा करने के बजाय उन्हें लूटना शुरू कर देंगे। जनता पर भारी करों (Taxes) का बोझ लाद दिया जाएगा और सत्ता सिर्फ भोग-विलास का जरिया बनकर रह जाएगी। जिस पर जनता का भरोसा होगा, वही धोखे का उस्ताद निकलेगा।

प्रकृति का तांडव और गिरती सेहत
क्या आपने गौर किया है कि आजकल 30-40 साल की उम्र में ही लोग पुरानी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं? नारद पुराण कहता है कि कलयुग में अन्न अपनी पौष्टिकता खो देगा और धरती फल देना बंद कर देगी। समय से पहले ही इंसानों की आयु घटने लगेगी। कम बारिश और भीषण सूखे की वजह से अकाल पड़ेगा और लोग प्यास और भूख से तड़पने लगेंगे। इंसान की शारीरिक लम्बाई भी कम होने लगेगी।

अधर्म के चश्मे से दुनिया का नजारा
पंडितों और गुरुओं के बारे में भी नारद पुराण में तीखी बात कही गई है। बताया गया है कि शास्त्रों को जानने वाले लोग उसका प्रयोग केवल पेट भरने के लिए करेंगे, भक्ति के लिए नहीं। दान केवल लोक-लाज और वाहवाही के लिए दिया जाएगा। स्त्रियां और पुरुष दोनों ही मर्यादा को भूलकर उन्मुक्त व्यवहार करेंगे, जिसे लोग 'स्वतंत्रता' का नाम देंगे।

क्या अब कोई उम्मीद नहीं बची?
सुनने में ये सब बड़ा भयावह लगता है, लेकिन शास्त्रों में उम्मीद की किरण भी दिखाई गई है। कलयुग में अधर्म अपने चरम पर होगा, तभी कल्कि अवतार के जरिए एक नए युग (सतयुग) की नींव रखी जाएगी।

कलयुग के इन दुष्प्रभावों से बचने का सिर्फ एक ही रास्ता बताया गया है 'नाम सिमरन' और 'सच्ची भक्ति'। जब दुनिया में शोर और अशांति बढ़ेगी, तो सिर्फ वही लोग खुद को बचा पाएंगे जो अपने मन की शांति और अध्यात्म से जुड़े होंगे।

आपको क्या लगता है?
क्या हमारे आस-पास आज जो हो रहा है, वो उसी नारद पुराण की चेतावनी का हिस्सा है? क्या आपको लगता है कि वाकई हम 'घोर कलयुग' में प्रवेश कर चुके हैं? कमेंट्स में अपनी राय जरूर दें!