सिर्फ रंग और डिज़ाइन नहीं, खुशहाल शादी के लिए कार्ड बनवाते वक्त रखें इन वास्तु नियमों का खास ख्याल

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News India Live, Digital Desk : हम महीनों पहले से बेस्ट प्रिंटिंग प्रेस ढूंढते हैं, सबसे सुंदर फॉन्ट चुनते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके कार्ड का रंग या उसका आकार आपके आने वाले रिश्तों पर असर डाल सकता है? वास्तु शास्त्र की मानें तो शादी का कार्ड एक ऐसी ऊर्जा (Energy) है जिसे आप अपनों को भेजते हैं। अगर इसकी बनावट और भाव सही हो, तो वर-वधू का जीवन खुशियों से भरा रहता है।

1. रंगों का चुनाव: लाल और पीला ही क्यों?
अक्सर बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि शादी के कार्ड में पीला, लाल, केसरिया या गुलाबी रंग होना चाहिए। वास्तु के हिसाब से ये रंग उत्साह, प्रेम और शुभता का प्रतीक हैं। आजकल फैशन के चक्कर में लोग गहरे भूरे (Brown), ग्रे या काले (Black) रंग के कार्ड छपवाने लगे हैं। वास्तु की मानें तो इन रंगों से बचना चाहिए क्योंकि ये उदासी या राहु-शनि के नकारात्मक प्रभाव को दर्शाते हैं, जो नए रिश्ते की शुरुआत के लिए ठीक नहीं हैं।

2. गणेश जी का स्थान और प्रतीक
शादी का पहला कार्ड 'विघ्नहर्ता' गणेश जी को समर्पित होता है। कार्ड पर गणेश जी की प्रतिमा या स्वास्तिक, ॐ का होना अनिवार्य माना गया है। लेकिन ध्यान रहे, भगवान की तस्वीर ऐसी न हो कि कार्ड खोलने पर वो फटे या उन पर कोई लकीर आए। सादा और सुंदर चिह्न ही सबसे बेहतर होता है।

3. आकार पर दें ध्यान (Rectangle vs Irregular Shapes)
आजकल कोई गोल कार्ड बनवा रहा है, तो कोई तिकोन (Triangle)। लेकिन वास्तु के अनुसार, चौकोर (Square) या आयताकार (Rectangle) कार्ड ही सबसे शुभ होते हैं। ये चारों दिशाओं और स्थिरता (Stability) का प्रतिनिधित्व करते हैं। नुकीले या बहुत ज़्यादा टेढ़े-मेढ़े आकार वाले कार्ड घर में तनाव पैदा कर सकते हैं।

4. खुशबू और शुद्धता
क्या आपने गौर किया है कि कुछ लोग कार्ड पर चमेली या चंदन का इत्र छिड़कते हैं? वास्तु कहता है कि जिस कार्ड में भीनी-भीनी खुशबू होती है, वह शुक्र (Venus) को मजबूत करता है। शुक्र प्रेम और दांपत्य जीवन का स्वामी है, इसलिए सुगंधित कार्ड घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।

5. कार्ड देने के बाद का सम्मान
अक्सर शादी के बाद लोग बचे हुए कार्ड कूड़े में फेंक देते हैं या इधर-उधर पड़े रहते हैं। चूंकि कार्ड पर देवी-देवताओं के नाम और तस्वीरें होती हैं, ऐसा करना अशुभ माना गया है। बचे हुए कार्डों को या तो प्रवाहित कर दें या कहीं सुरक्षित रख दें ताकि अपमान न हो।

चलते-चलते एक छोटी सी सलाह:
रिश्ता दिल से बनता है, लेकिन अगर थोड़े से वास्तु नियमों का पालन कर लिया जाए, तो खुशियाँ और भी बढ़ जाती हैं। कार्ड छपवाने से पहले उसे एक बार किसी जानकर से जरूर चेक कराएं।

आपकी क्या राय है?
क्या आपने कभी नोटिस किया है कि रंगों का हमारे मन पर क्या असर पड़ता है? अपनी शादी के कार्ड के बारे में कोई खास याद हो तो कमेंट्स में हमारे साथ साझा करें