Balochistan Attack : 80 सैनिकों की मौत से बौखलाया पाकिस्तान ,खुद की विफलता छिपाने के लिए फिर अलापा भारत का राग
News India Live, Digital Desk: बलूचिस्तान में हुए अब तक के सबसे भीषण आतंकी हमले ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं। इस हमले में 80 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इस भारी नुकसान से उपजे आंतरिक दबाव और अपनी खुफिया विफलता को छिपाने के लिए पाकिस्तान ने एक बार फिर अपना पुराना पैंतरा आजमाया है। पाकिस्तानी हुक्मरानों और सेना ने बिना किसी ठोस सबूत के इस हमले का ठीकरा भारत के सिर फोड़ना शुरू कर दिया है।
भीषण हमला और भारी जानी नुकसान: क्या हुआ बलूचिस्तान में?
बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में उग्रवादियों ने पाकिस्तानी सेना के काफिले और चौकियों को निशाना बनाकर सिलसिलेवार हमले किए। खबरों के मुताबिक, विद्रोहियों ने आधुनिक हथियारों और विस्फोटकों का इस्तेमाल किया, जिसमें पाकिस्तानी सेना के कम से कम 80 जवान शहीद (पाक के नजरिए से हताहत) हो गए। यह पिछले कई दशकों में पाकिस्तानी सेना पर हुआ सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली है।
पाकिस्तान का 'ब्लेम गेम': भारत पर लगाए बेबुनियाद आरोप
हमले के कुछ ही घंटों बाद, पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री और सेना के प्रवक्ता ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान भटकाने के लिए भारत विरोधी बयानबाजी तेज कर दी। पाकिस्तान का दावा है कि इन हमलों की साजिश सीमा पार (भारत) रची गई थी। हालांकि, वैश्विक कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह पाकिस्तान की पुरानी आदत है—जब भी वह अपने आंतरिक विद्रोह को संभालने में विफल रहता है, तो वह भारत का नाम लेकर अपनी जनता को गुमराह करने की कोशिश करता है।
BLA और पाकिस्तान सेना के बीच बढ़ता संघर्ष
बलूचिस्तान में अशांति की जड़ें काफी गहरी हैं। बलूच नागरिक लंबे समय से पाकिस्तान पर उनके संसाधनों की लूट और मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं।
CPEC प्रोजेक्ट का विरोध: बलूच विद्रोही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का कड़ा विरोध कर रहे हैं, जिसे वे अपनी जमीन पर कब्जा मानते हैं।
बढ़ती मारक क्षमता: विशेषज्ञों का मानना है कि BLA की मारक क्षमता में अचानक वृद्धि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा नीतियों की विफलता का नतीजा है, न कि किसी बाहरी हस्तक्षेप का।
भारत का रुख: "अपने घर को संभालें"
भारत ने हमेशा पाकिस्तान के इन दावों को सिरे से खारिज किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए 'फैक्ट्री' चलाने के बजाय अपने आंतरिक मुद्दों को सुलझाने और आतंकवाद के सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में पनप रहे उग्रवाद की जड़ें उसकी अपनी गलत नीतियों में हैं।
चीन की चिंता और पाकिस्तान पर बढ़ता दबाव
इस हमले ने चीन की भी नींद उड़ा दी है, क्योंकि बलूचिस्तान में उसके अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। 80 सैनिकों की मौत के बाद अब पाकिस्तान पर यह दबाव है कि वह या तो विद्रोह को कुचले या फिर अपने संसाधनों पर बलूचों के हक को स्वीकार करे। 'भारत पर आरोप' लगाना इस गंभीर संकट का कोई समाधान नहीं है।