BREAKING:
April 01 2026 09:38 am

कलयुग में इस रहस्यमयी जगह पर आज भी साक्षात निवास करते हैं बजरंगबली, जानिए कहां है यह गुप्त स्थान

Post

News India Live, Digital Desk: शास्त्रों और पुराणों में वर्णित है कि संकटमोचन हनुमान जी अजर और अमर हैं। उन्हें कलियुग का जाग्रत देवता माना जाता है। मान्यता है कि रामभक्त हनुमान आज भी सशरीर धरती पर मौजूद हैं और अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनके सभी कष्टों को हर लेते हैं। आगामी हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Jayanti 2026) के पावन अवसर पर हर भक्त यह जानने को उत्सुक रहता है कि आखिर कलयुग में भगवान हनुमान का निवास स्थान कहां है? धार्मिक ग्रंथों में उस गुप्त और पवित्र स्थान का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, जहां बजरंगबली आज भी विराजमान हैं।

अमरता का वरदान और अष्ट चिरंजीवियों में शामिल हैं हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार माने जाने वाले मारुति नंदन हनुमान जी को माता सीता और भगवान श्रीराम से अमरता का अमोघ वरदान प्राप्त हुआ था। इसी वरदान के प्रताप से वे अष्ट चिरंजीवियों (आठ अमर महापुरुषों) में से एक माने जाते हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी त्रेता युग से लेकर द्वापर युग और अब कलयुग में भी इस पृथ्वी पर मौजूद हैं। वे हर युग में धर्म की रक्षा और अपने सच्चे भक्तों का कल्याण करने के लिए धरती पर ही भ्रमण करते रहते हैं।

कलयुग में कहां है बजरंगबली का असली ठिकाना? पुराणों के अनुसार, कलयुग में सभी संकटों को हरने वाले और राम नाम के रसिया हनुमान जी 'गंधमादन पर्वत' (Gandhamadan Parvat) पर निवास करते हैं। यह पर्वत कोई साधारण स्थान नहीं है, बल्कि एक अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी जगह है। भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो शास्त्रों में इस दिव्य पर्वत की स्थिति कैलाश पर्वत के उत्तर दिशा में और सुमेरू पर्वत के निकट बताई गई है। ऐसा माना जाता है कि गंधमादन पर्वत पवित्र कैलाश मानसरोवर और भगवान विष्णु के धाम बद्रीनाथ के ठीक बीच में स्थित है।

आम इंसान की पहुंच से कोसों दूर है यह दिव्य पर्वत धर्म के जानकारों और पौराणिक कथाओं के अनुसार, गंधमादन पर्वत सिद्ध ऋषि-मुनियों और देवताओं की तपोभूमि है। इस पर्वत का वातावरण इतना आलौकिक और पवित्र है कि यहां किसी आम इंसान का सशरीर पहुंचना लगभग असंभव है। केवल सिद्ध पुरुष, उच्च कोटि के साधक या वे लोग ही इस पर्वत तक पहुंच सकते हैं, जिन पर स्वयं ईश्वर की असीम कृपा हो और जिनके कर्म अत्यंत पवित्र हों। दिलचस्प बात यह है कि इस रहस्यमयी गंधमादन पर्वत का विस्तृत उल्लेख सिर्फ हिंदू धर्म ग्रंथों में ही नहीं, बल्कि प्राचीन बौद्ध साहित्य में भी एक अत्यंत दिव्य स्थल के रूप में किया गया है।

हनुमान जन्मोत्सव पर ध्यान से पूरी होती है हर मुराद चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जन्मोत्सव का पावन पर्व पूरे देश में बड़ी ही आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जो भी साधक सच्चे मन से गंधमादन पर्वत की ओर ध्यान लगाकर मारुति नंदन का स्मरण करता है, उसके सारे दुख-दर्द पल भर में छूमंतर हो जाते हैं। आप भी इस दिन हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ कर गंधमादन वासी बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं।