सिद्धि विनायक मंदिर में 7 से 11 जनवरी तक बदल जाएगी व्यवस्था, नहीं होंगे मुख्य मूर्ति के दर्शन

Post

News India Live, Digital Desk : अगर आप मुंबई के प्रभादेवी स्थित प्रसिद्ध श्री सिद्धि विनायक (Siddhivinayak) मंदिर में दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो जरा ठहरिए और अपना शेड्यूल चेक कर लीजिए। मंदिर प्रशासन ने एक जरूरी सूचना दी है कि आने वाली 7 जनवरी से 11 जनवरी तक बप्पा की मुख्य मूर्ति के दर्शन भक्तों को नहीं मिल पाएंगे।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर बप्पा हमसे दूर क्यों हो रहे हैं? घबराइए नहीं, वजह बहुत शुभ और पारंपरिक है।

क्या है वजह? (सिंदूर लेपन विधि)
दरअसल, हर साल की तरह इस बार भी गणपति बप्पा की मूर्ति पर 'सिंदूर लेपन' की पवित्र विधि की जाएगी। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बप्पा की मूर्ति पर सिंदूर का लेप लगाया जाता है, जिसे उनके श्रृंगार और मूर्ति की देखभाल का अहम हिस्सा माना जाता है। इस दौरान मूर्ति को स्पर्श करना या उसके पास जाना मना होता है ताकि लेप अच्छे से सूख जाए और बप्पा का तेज और निखर कर आए।

भक्तों के लिए क्या है विकल्प?
अब सवाल यह है कि क्या मंदिर बंद रहेगा? जवाब है—बिल्कुल नहीं! बप्पा अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते।
भले ही आप 'गर्भगृह' में विराजमान मुख्य मूर्ति के दर्शन न कर पाएं, लेकिन मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों के लिए एक 'प्रतिमूर्ति' (Replica) की व्यवस्था की है। 7 जनवरी से 11 जनवरी तक भक्त इसी प्रतिमूर्ति के दर्शन और पूजन कर सकेंगे। आपको बप्पा का आशीर्वाद उतना ही मिलेगा, बस मुख्य मूर्ति आराम विश्राम और श्रृंगार में रहेगी।

कब से खुलेंगे कपाट?
सिंदूर लेपन की यह विधि 5 दिनों तक चलेगी। 11 जनवरी को यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद, यानी 12 जनवरी से भक्त फिर से अपने प्यारे गणपति बप्पा के उसी मनमोहक रूप का दर्शन कर पाएंगे, जिसके लिए वे दूर-दूर से आते हैं।

आसान शब्दों में सलाह
अगर आपने विशेष रूप से इन तारीखों में दर्शन का प्लान बनाया है और आपको सिर्फ 'मुख्य मूर्ति' ही देखनी है, तो अपना प्लान 12 जनवरी के बाद शिफ्ट कर लें। लेकिन अगर आप सिर्फ माथा टेकना चाहते हैं और आस्था मन में है, तो प्रतिमूर्ति के दर्शन के लिए जरूर जाएं। वहां का माहौल हमेशा की तरह भक्तिमय ही रहेगा।

तो दोस्तों, यह जानकारी अपने उन सभी रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ शेयर कर दीजिए जो मुंबई में हैं या सिद्धि विनायक जाने का सोच रहे हैं, ताकि वे वहां जाकर परेशान न हों।