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April 22 2026 07:44 am

घबराहट या गहरी उदासी? कहीं आप भी तो नहीं हैं एंजायटी और डिप्रेशन के बीच कंफ्यूज, डॉक्टर से जानें दोनों का अंतर

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News India Live, Digital Desk : भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते तनाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) की समस्याएं आम हो गई हैं। अक्सर लोग 'एंजायटी' (Anxiety) और 'डिप्रेशन' (Depression) को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन मेडिकल विज्ञान की नजर में ये दोनों स्थितियां बिल्कुल अलग हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर इनकी पहचान न होने से समस्या गंभीर रूप ले सकती है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं कि इन दोनों के बीच की बारीक रेखा क्या है और इनके लक्षण कैसे एक-दूसरे से जुदा हैं।

क्या है एंजायटी? (भविष्य का डर और घबराहट)

डॉक्टरों के अनुसार, एंजायटी यानी 'चिंता' भविष्य में होने वाली किसी अनहोनी के डर से जुड़ी होती है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति लगातार आने वाले समय के बारे में सोचकर घबराता रहता है।

लक्षण: दिल की धड़कन तेज होना, बेचैनी, पसीना आना, सांस फूलना और नींद न आना।

अवस्था: इसमें व्यक्ति 'हाइपर' महसूस करता है और हर वक्त किसी खतरे के आने का इंतजार करता रहता है।

क्या है डिप्रेशन? (अतीत का बोझ और गहरी निराशा)

डिप्रेशन यानी 'अवसाद' एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति का मन उदास रहता है और वह अपनी पसंदीदा चीजों में भी रुचि खो देता है। यह अक्सर अतीत की घटनाओं या लंबे समय से चल रही निराशा से जुड़ा होता है।

लक्षण: हर वक्त थकान महसूस होना, ऊर्जा की कमी, बहुत ज्यादा या बहुत कम नींद आना, भूख न लगना और खुद को अकेला महसूस करना।

अवस्था: इसमें व्यक्ति बहुत 'लो' और ऊर्जाविहीन महसूस करता है। उसे लगता है कि अब कुछ भी ठीक नहीं हो सकता।

क्या ये दोनों एक साथ हो सकते हैं?

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कई मामलों में 'को-मोरबिडिटी' देखी जाती है, यानी व्यक्ति को एंजायटी और डिप्रेशन दोनों एक साथ हो सकते हैं। लंबे समय तक रहने वाली एंजायटी आगे चलकर डिप्रेशन का रूप ले सकती है। उदाहरण के लिए, किसी बात को लेकर लगातार चिंता करना (Anxiety) व्यक्ति को इतना थका देता है कि वह अंततः गहरी निराशा (Depression) में डूब जाता है।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ये लक्षण दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बने रहें और आपके रोजमर्रा के कामों (Office, Home, Study) को प्रभावित करने लगें, तो इसे नजरअंदाज न करें। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का इलाज काउंसलिंग, थेरेपी और कुछ मामलों में दवाओं के जरिए सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

बचाव के लिए जरूरी बातें:

शारीरिक सक्रियता: नियमित व्यायाम और योग मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं।

पर्याप्त नींद: रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद दिमाग को शांत रखती है।

बात करें: अपनी भावनाओं को परिवार या दोस्तों के साथ साझा करें, मन में न दबाएं।

कैफीन से दूरी: चाय, कॉफी और शराब का अत्यधिक सेवन एंजायटी को बढ़ा सकता है।