Anhedonia : सब कुछ होते हुए भी क्या आप अंदर से खालीपन महसूस करते हैं? जानें एनहेडोनिया के लक्षण और बचाव के तरीके

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News India Live, Digital Desk : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर ऑफिस के काम, परिवार की जिम्मेदारियों और सोशल लाइफ के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। इस होड़ में हम अपनी मेंटल हेल्थ (Mental Health) को पीछे छोड़ देते हैं। कई बार ऐसी स्थिति आती है जब हमारे पास करियर, पैसा, दोस्त और परिवार सब कुछ होता है, फिर भी मन के किसी कोने में एक अजीब सा खालीपन महसूस होता है।

अगर आपको भी अपनी पसंदीदा चीजों में अब कोई दिलचस्पी नहीं रही है या आप खुश होना ही भूल गए हैं, तो सावधान हो जाइए। आप एनहेडोनिया (Anhedonia) का शिकार हो सकते हैं।

क्या है एनहेडोनिया? (What is Anhedonia)

एनहेडोनिया केवल सामान्य उदासी या 'मूड ऑफ' होना नहीं है। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति की खुशी या आनंद महसूस करने की क्षमता कम या पूरी तरह खत्म हो जाती है।

पहचान: इसमें व्यक्ति को वे चीजें भी अच्छी नहीं लगतीं जो उसे पहले बेहद पसंद थीं। जैसे—पसंदीदा खाना बेस्वाद लगना, म्यूजिक से चिड़चिड़ाहट होना, या दोस्तों के साथ घूमने जाने का मन न करना।

भ्रम: लोग अक्सर इसे थकान या काम का तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहना गंभीर मेंटल डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है।

एनहेडोनिया के मुख्य लक्षण: कहीं आपमें भी तो नहीं?

एनहेडोनिया के संकेत बहुत सूक्ष्म होते हैं, जिन्हें पहचानना जरूरी है:

दिलचस्पी का खत्म होना: अपने पुराने शौक (Hobbies) को बोझ समझना।

भावनात्मक शून्यता: न दुख महसूस होना, न खुशी। मन का हर समय 'सुन्न' (Numb) रहना।

रिश्तों में दूरी: अपनों के साथ वक्त बिताने में कोई जुड़ाव महसूस न करना।

बेरुखी: किसी भी अच्छी खबर या उपलब्धि पर उत्साह महसूस न कर पाना।

चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना और हर चीज को एक मजबूरी की तरह लेना।

क्यों होती है यह समस्या?

रिसर्च के अनुसार, एनहेडोनिया अक्सर डिप्रेशन (Depression) का एक मुख्य लक्षण होता है। हालांकि, इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं:

क्रोनिक स्ट्रेस: लंबे समय तक काम या निजी जीवन का दबाव।

नींद की कमी: लगातार नींद पूरी न होने से दिमाग की खुशी महसूस करने वाली कोशिकाएं प्रभावित होती हैं।

इमोशनल ब्रेकडाउन: किसी पुराने सदमे या भावनात्मक चोट के कारण।

केमिकल असंतुलन: मस्तिष्क में डोपामाइन (Dopamine) जैसे 'फील गुड' हार्मोन की कमी होना।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

यदि आपको हफ़्तों तक ऐसा महसूस हो रहा है कि आपका जीवन रंगहीन (Colorless) हो गया है और आप चाहकर भी मुस्कुरा नहीं पा रहे हैं, तो इसे गंभीरता से लें।

उपचार: थेरेपी, काउंसलिंग और कुछ मामलों में दवाइयों के जरिए इस स्थिति को ठीक किया जा सकता है।

स्वयं की मदद: अपनी भावनाओं को किसी भरोसेमंद दोस्त से साझा करें, डिजिटल डिटॉक्स (सोशल मीडिया से दूरी) अपनाएं और छोटी-छोटी सैर या मेडिटेशन से शुरुआत करें याद रखें: मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। अपनी "खुशी" को वापस पाना आपका अधिकार है, इसे शर्मिंदगी का विषय न बनाएं।