एक ऐसी अप्सरा जिसने भगवानों के होश उड़ा दिए, क्या आप जानते हैं तिलोत्तमा की रचना के पीछे का वो रहस्य?
News India Live, Digital Desk: हम सबने अप्सराओं के बारे में सुना है वो खूबसूरत देवांगनाएँ जो इंद्र की सभा में नृत्य करती थीं। लेकिन 'तिलोत्तमा' कोई आम अप्सरा नहीं थी। उसे किसी माता-पिता ने जन्म नहीं दिया था, बल्कि उसे खुद सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी ने एक बहुत बड़े 'मिशन' के लिए बनाया था।
दो भाइयों की आतंक भरी दास्तां
बात उस समय की है जब सुंद और उपसुंद नाम के दो सगे राक्षस भाई हुआ करते थे। इन दोनों में इतनी गहरी दोस्ती थी कि वे खाते-पीते, सोते और घूमते हमेशा साथ थे। उन्होंने घोर तपस्या की और ब्रह्मा जी से वरदान मांग लिया कि उन्हें दुनिया में कोई नहीं मार पाएगा, सिवाय 'एक-दूसरे' के।
अब उन्हें पता था कि वे एक-दूसरे की जान कभी लेंगे नहीं, इसलिए वे अमर जैसे हो गए और स्वर्ग से लेकर पृथ्वी तक तबाही मचा दी। देवता भी उनसे परेशान हो गए थे।
ब्रह्मा जी की अनोखी रचना: तिलोत्तमा
जब इन दोनों भाइयों को हराना नामुमकिन हो गया, तब ब्रह्मा जी ने विश्वकर्मा को बुलाया और एक ऐसी रचना करने को कहा जो सुंदरता की हर हद पार कर दे। विश्वकर्मा ने दुनिया भर की कीमती और सुंदर चीज़ों के कण-कण (तिल-तिल) इकट्ठा किए। क्योंकि यह 'तिल-तिल' कणों से बनी थी और 'उत्तम' (सर्वश्रेष्ठ) थी, इसीलिए इसका नाम रखा गया— तिलोत्तमा।
तिलोत्तमा इतनी सुंदर थी कि पौराणिक ग्रंथों में लिखा है कि जब वह ब्रह्मा जी की सभा में पहुँची, तो उसकी सुंदरता को अपलक निहारने के लिए खुद शिव जी के चार मुख और इंद्र की हज़ार आँखें हो गईं।
जब प्यार और लालच बना विनाश का कारण
तिलोत्तमा को उस जंगल में भेजा गया जहाँ सुंद और उपसुंद शिकार खेल रहे थे। जैसे ही उन दोनों भाइयों ने तिलोत्तमा को देखा, वे अपनी सारी वफ़ादारी भूल गए। जो भाई कल तक एक-दूसरे के लिए जान देने को तैयार थे, वे आज एक-दूसरे की जान के प्यासे हो गए।
तिलोत्तमा ने उनके बीच की कड़वाहट का फायदा उठाया। दोनों भाई इस बात पर अड़ गए कि वे तिलोत्तमा को अपनी पत्नी बनाएंगे। विवाद इतना बढ़ा कि उनके बीच भयंकर युद्ध हुआ और उन्होंने अपने हाथों से एक-दूसरे का अंत कर दिया। इस तरह, एक खूबसूरत अप्सरा ने बिना कोई हथियार उठाए, दुनिया को एक महान संकट से बचा लिया।
सबक क्या मिलता है?
तिलोत्तमा की यह कहानी हमें सिखाती है कि चाहे आप कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, यदि आप लालच और अहंकार के वशीभूत हो जाते हैं, तो आपकी बुद्धि काम करना बंद कर देती है। सुंद और उपसुंद का वह घमण्ड ही था जिसने उन्हें एक-दूसरे का दुश्मन बना दिया।
अक्सर हम खूबसूरती को केवल बाहरी चकाचौंध समझते हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि इसी सुंदरता का उपयोग कई बार बुद्धि और कूटनीति के साथ अधर्म को खत्म करने के लिए भी किया गया है।
आपको तिलोत्तमा की यह कहानी कैसी लगी? क्या आपको भी लगता है कि घमण्ड किसी भी रिश्ते को तोड़ सकता है? अपनी राय हमें कमेंट में ज़रूर बताएँ।