अमेरिका की दुनिया भर को ग्लोबल वॉर्निंग अब निशाने पर आ सकते हैं अमेरिकी नागरिक, ईरान समर्थकों के खौफ से हाई अलर्ट पर दुनिया
News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण जंग और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने अब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा का खतरा पैदा कर दिया है। अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए एक 'ग्लोबल वॉर्निंग' जारी की है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि दुनिया भर में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और नागरिकों को ईरान समर्थक संगठन अपना निशाना बना सकते हैं। जो बाइडन प्रशासन की इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और विदेशों में रह रहे अमेरिकियों को 'अत्यधिक सावधानी' बरतने की सलाह दी गई है।
ईरान समर्थकों का 'स्लीपर सेल' एक्टिव होने का डर
अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) द्वारा जारी ताजा एडवाइजरी के मुताबिक, ईरान और उसके सहयोगी संगठन अब केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। खुफिया इनपुट्स बताते हैं कि ईरान समर्थक समूह दुनिया के किसी भी कोने में अमेरिकी हितों, दूतावासों या वहां रहने वाले पर्यटकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। विशेष रूप से मध्य पूर्व, यूरोप और एशिया के कुछ हिस्सों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अमेरिका का मानना है कि सीधे सैन्य टकराव के बजाय अब ईरान 'अप्रत्यक्ष हमलों' (Proxy Attacks) के जरिए बदला लेने की फिराक में है।
होरमुज की घेराबंदी और $175 तेल का खतरा
इस तनाव का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज को लेकर ईरान को 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के बयानों ने साफ कर दिया है कि अमेरिका पीछे हटने के मूड में नहीं है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह तनाव ऐसे ही बढ़ता रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें $175 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। अमेरिका में पहले ही गैस की कीमतें 34% तक बढ़ चुकी हैं, जिससे वैश्विक बाजार में भी महंगाई का नया तूफान आने की आशंका है।
युद्ध के लिए $200 अरब के फंड की मांग
पेंटागन ने ईरान के खिलाफ सैन्य ऑपरेशंस और अपनी नौसैनिक उपस्थिति को मजबूत करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से अतिरिक्त $200 अरब के फंड की मांग की है। हालांकि, अमेरिका के भीतर ही इस मांग का भारी विरोध शुरू हो गया है। डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने पिछले साल के भारी रक्षा बजट का हवाला देते हुए इस नई मांग पर सवाल उठाए हैं। वहीं, अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि ईरान की वायुसेना और नौसेना को पूरी तरह नष्ट करने के लिए यह फंड जरूरी है ताकि उसे परमाणु हथियार बनाने से रोका जा सके।