Amalaki Ekadashi 2026 : कब है अमलकी एकादशी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और 5 अचूक उपाय
News India Live, Digital Desk : सनातन धर्म में अमलकी एकादशी का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है क्योंकि इसकी उत्पत्ति भगवान के श्रीमुख से हुई थी। साल 2026 में अमलकी एकादशी पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जो इस दिन किए गए दान और पुण्य के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देंगे।
अमलकी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Correct Date & Timings)
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय नीचे दिया गया है:
एकादशी तिथि प्रारंभ: 27 फरवरी 2026, शाम 04:52 बजे से।
एकादशी तिथि समाप्त: 28 फरवरी 2026, शाम 05:45 बजे तक।
उदयातिथि के अनुसार व्रत: 28 फरवरी 2026, शनिवार को अमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
पारण का समय (Parana Timing):
व्रत खोलने (पारण) का सबसे शुभ समय 1 मार्च 2026 को सुबह 06:45 से सुबह 09:03 के बीच रहेगा।
अमलकी एकादशी का महत्व: क्यों की जाती है आंवले की पूजा?
शास्त्रों के अनुसार, 'आमलकी' का अर्थ है आंवला। भगवान विष्णु ने स्वयं कहा है कि जो व्यक्ति इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर उनकी पूजा करता है और आंवले का दान करता है, उसे राजसूय यज्ञ के समान फल मिलता है। वाराणसी में इसे रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है, जहाँ बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार होता है।
कष्टों से मुक्ति के लिए करें ये 5 विशेष उपाय (Remedies for Success)
आंवले का वृक्षारोपण: यदि संभव हो तो इस दिन घर या किसी मंदिर में आंवले का पौधा लगाएं। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है।
श्री हरि को अर्पण: पूजा के दौरान भगवान विष्णु को 21 ताजे आंवले अर्पित करें। इससे अटके हुए काम पूरे होने लगते हैं।
आंवले का उबटन: एकादशी के दिन पानी में आंवले का रस मिलाकर स्नान करें। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
दीपदान: शाम के समय आंवले के पेड़ के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाएं और 9 बार परिक्रमा करें। यह उपाय दाम्पत्य जीवन में मधुरता लाता है।
पीला रंग और आंवला दान: इस दिन पीले वस्त्र पहनें और गरीबों को आंवले का फल, अनाज या वस्त्र दान करें।
व्रत के नियम: रखें इन बातों का ध्यान
एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है।
इस दिन क्रोध न करें और किसी की निंदा करने से बचें।
यदि आप आंवले के वृक्ष के पास नहीं जा सकते, तो भगवान विष्णु की मूर्ति के पास आंवला रखकर पूजा करें।