एयर इंडिया क्रैश: अमेरिकी वकील ने उठाए सवाल - क्या भारतीय यात्रियों की जान सस्ती है?
केरल के कोझिकोड में हुआ एयर इंडिया एक्सप्रेस का दर्दनाक हादसा आज भी लोगों के जेहन में ताजा है. उस हादसे ने कई परिवारों को हमेशा के लिए तोड़ दिया. अब इस मामले में एक नया मोड़ आया है, जिसने दुनिया की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग (Boeing) को कटघरे में खड़ा कर दिया है. अमेरिका के एक जाने-माने अटॉर्नी ने आरोप लगाया है कि इस दुर्घटना की एक बड़ी वजह बोइंग विमान के डिजाइन में खामियां थीं.
यह मामला सिर्फ तकनीकी खामियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीयों को मिलने वाले मुआवजे पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है.
बोइंग के डिजाइन पर गंभीर सवाल
अमेरिकी अटॉर्नी और विमानन कानून के विशेषज्ञ, मार्क लिंडर ने दावा किया है कि बोइंग 737 विमान के रनवे ओवररन यानी रनवे से आगे निकल जाने की समस्या के बारे में कंपनी को पहले से पता था. उन्होंने कहा कि अगर विमान में आधुनिक सेफ्टी फीचर, जैसे ऑटो-ब्रेकिंग सिस्टम को अपग्रेड किया गया होता, तो शायद यह भयानक हादसा टाला जा सकता था. उनका आरोप है कि कंपनी ने मुनाफा कमाने के चक्कर में सुरक्षा फीचर्स को एक विकल्प के तौर पर रखा, जिसे एयरलाइंस को अलग से खरीदना पड़ता है.
मुआवजे में भेदभाव क्यों?
सबसे चौंकाने वाली और दिल दुखाने वाली बात मुआवजे को लेकर सामने आई है. लिंडर ने बताया कि अगर ऐसा ही हादसा अमेरिका में हुआ होता, तो पीड़ितों के परिवारों को करोड़ों डॉलर का मुआवजा मिलता. लेकिन भारत में यह रकम बहुत कम हो जाती है. यह एक तरह का भेदभाव है, जो दिखाता है कि बड़ी कंपनियां विकासशील देशों के नागरिकों की जान की कीमत कम आंकती हैं.
यह सवाल उठता है कि क्या किसी की जान की कीमत इस बात पर तय होनी चाहिए कि वो किस देश का नागरिक है? अमेरिकी वकील ने इसी भेदभाव को खत्म करने के लिए भारत में भी अमेरिकी कानून के तहत मुकदमा लड़ने और उचित मुआवजा दिलाने की बात कही है.
यह मामला सिर्फ एक विमान हादसे की जांच नहीं है, बल्कि यह हमारे सिस्टम, हमारे अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की जिम्मेदारी पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है. उम्मीद है कि पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिलेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे.