नीतीश के बाद कौन? JDU ने BJP के सामने रख दीं कड़ी शर्तें, कहा एमपी-राजस्थान वाला प्रयोग यहां नहीं चलेगा
News India Live, Digital Desk: बिहार की सियासत में इन दिनों 'इस्तीफे' और 'उत्तराधिकारी' के नाम को लेकर जबरदस्त खींचतान मची हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि सूबे को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिलेगा, लेकिन जनता दल (यूनाइटेड) ने अब अपना रुख साफ कर दिया है। JDU ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दोटूक चेतावनी देते हुए कहा है कि बिहार में मध्य प्रदेश या राजस्थान जैसा कोई 'सरप्राइज प्रयोग' नहीं चलेगा। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश का उत्तराधिकारी वही होगा जिस पर 'सुशासन बाबू' की मुहर लगेगी।
दिल्ली से पटना तक हलचल तेज, JDU का कड़ा रुख
सूत्रों के मुताबिक, JDU ने गठबंधन की मर्यादा की याद दिलाते हुए बीजेपी के सामने कुछ अहम शर्तें रख दी हैं। पार्टी का मानना है कि बिहार एक राजनीतिक रूप से जागरूक प्रदेश है, यहाँ किसी गुमनाम चेहरे को अचानक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठाया जा सकता। JDU के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "बिहार में समाजवादी विचारधारा की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहाँ नेतृत्व का फैसला जातीय समीकरणों और सामाजिक न्याय की विरासत को ध्यान में रखकर ही होना चाहिए।"
निशांत कुमार की 'एंट्री' और डिप्टी सीएम पद का सस्पेंस
बिहार की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर हो रही है। चर्चा है कि उत्तराधिकार की इस जंग में JDU अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निशांत कुमार को 'डिप्टी सीएम' बनाने का दांव खेल सकती है। हालांकि, बीजेपी इस प्रस्ताव पर कितनी सहज होगी, यह कहना मुश्किल है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी के अंदर से भी सम्राट चौधरी जैसे दिग्गज नामों को लेकर चर्चाएं गर्म हैं, जिन्हें नीतीश कुमार ने हाल ही में सार्वजनिक मंचों पर काफी तवज्जो दी है।
समृद्धि यात्रा के बाद इस्तीफे की घड़ी? गठबंधन में मंथन जारी
नीतीश कुमार ने अपनी 'समृद्धि यात्रा' पूरी कर ली है और अब 8 अप्रैल से 13 अप्रैल के बीच उनके इस्तीफे और नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट तेज है। बीजेपी के प्रभारी विनोद तावड़े लगातार पटना में डेरा डाले हुए हैं और जेडीयू नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार की जनता अब टकटकी लगाए देख रही है कि 20 साल बाद राज्य की सत्ता में होने वाला यह 'बड़ा बदलाव' सुचारू रहता है या फिर गठबंधन के अंदर की ये शर्तें किसी नए सियासी तूफान को जन्म देंगी।