केरल में हाथ के सामने 4 बड़ी दीवारें क्या 10 साल का सूखा खत्म कर पाएगी कांग्रेस? एलडीएफ की हैट्रिक रोकने कीचुनौती
News India Live, Digital Desk : दक्षिण भारत के द्वार केरल में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए राजधानी तिरुवनंतपुरम की गद्दी तक पहुंचने का रास्ता कांटों भरा नजर आ रहा है। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए जहां सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) 'हैट्रिक' लगाने के इरादे से मैदान में है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस के सामने ऐसी चार बड़ी चुनौतियां हैं, जो उसकी जीत की राह में रोड़ा बन सकती हैं।
1. गुटबाजी का 'ग्रहण': थारूर बनाम आलाकमान की जंग
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी मुसीबत घर के अंदर की कलह है। दिग्गज नेता शशि थारूर और पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के बीच की तनातनी अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। हाल ही में राहुल गांधी की मौजूदगी वाली रणनीति बैठक से थारूर की दूरी ने साफ कर दिया है कि गुटबाजी का दीमक पार्टी को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। मुख्यमंत्री पद के चेहरों की भरमार ने कार्यकर्ताओं को भी भ्रम में डाल दिया है कि आखिर लड़ाई किसके नेतृत्व में लड़ी जा रही है।
2. वोट बैंक में सेंध: ईसाई-मुस्लिम समीकरण का बिगड़ता खेल
केरल की राजनीति में अल्पसंख्यक (ईसाई और मुस्लिम) समुदाय किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं, जो करीब 47% मतदाता हैं। इस बार ईसाई मतदाताओं का झुकाव चौंकाने वाला है। 'कोशी आयोग' की रिपोर्ट और चर्च की बढ़ती सक्रियता ने संकेत दिया है कि ईसाई मतदाता अब कांग्रेस के पारंपरिक पाले से निकलकर एलडीएफ या बीजेपी की ओर रुख कर सकते हैं। वहीं, जमात-ए-इस्लामी जैसे समूहों के साथ कांग्रेस की नजदीकी ने भी कई धर्मनिरपेक्ष मतदाताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
3. 'लाल किले' की मजबूती और पिनाराई का तिलस्म
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ ने लगातार दो बार सत्ता में रहकर इतिहास रचा है। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और आपदा प्रबंधन के रिकॉर्ड को तोड़ना कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। एलडीएफ ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा में जो 'कंटिन्यूटी' दिखाई है, उसके मुकाबले कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर मची बगावत ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है। वामपंथी खेमा कांग्रेस को 'बीजेपी की दूसरी टीम' बताकर आक्रामक प्रचार कर रहा है।
4. बीजेपी का बढ़ता ग्राफ: त्रिकोणीय मुकाबले का खतरा
केरल में अब तक मुकाबला द्विध्रुवीय (LDF vs UDF) रहा है, लेकिन 2026 के चुनाव में बीजेपी एक तीसरी बड़ी शक्ति बनकर उभर रही है। तिरुवनंतपुरम और त्रिशूर जैसे इलाकों में बीजेपी का बढ़ता वोट शेयर सीधे तौर पर कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा रहा है। राजीव चंद्रशेखर जैसे कद्दावर चेहरों की मैदान में मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। जानकारों का कहना है कि जहां भी मुकाबला त्रिकोणीय होगा, वहां वोट बंटने का सीधा फायदा एलडीएफ को मिल सकता है।