TMC से निकाले जाने के बाद और आक्रामक हुए कबीर, बाबरी मस्जिद को लेकर दी सीधी चेतावनी

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News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शांत बैठना नेताओं के स्वभाव में ही नहीं है, और बात जब हुमायूं कबीर की हो, तो बयानों का धमाका होना तय मानिए। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से सस्पेंड होने के बाद शांत होने की बजाय हुमायूं कबीर के तेवर और भी तीखे हो गए हैं। इस बार उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया है जिसे सुनकर विरोधियों के कान खड़े हो गए हैं और प्रशासन के माथे पर पसीना आ गया है।

"हिम्मत है तो हाथ लगाकर दिखाओ"

मुर्शिदाबाद के अपने गढ़ में हुमायूं कबीर ने एक जनसभा के दौरान भरी हुंकार भरी। उन्होंने साफ़ लफ्जों में कहा, "यह कोई अयोध्या नहीं है, जो बाबरी को कोई हाथ लगा दे।"

यह सिर्फ़ एक लाइन नहीं, बल्कि एक सीधी चुनौती थी। उनका इशारा साफ था कि मुर्शिदाबाद में उनका दबदबा है और यहां प्रशासन या कोई भी बाहरी ताकत उनके मंसूबों को नहीं रोक सकती। कबीर ने यह बयान उस विवाद के बीच दिया है, जिसमें उन्होंने 6 दिसंबर को इलाके में एक 'बाबरी मस्जिद' की नींव रखने का ऐलान किया है। जब उनसे पूछा गया कि प्रशासन इसे रोक सकता है या विरोधी इसका विरोध कर सकते हैं, तो उन्होंने अपने इस बयान से साफ कर दिया कि वो झुकने वाले नहीं हैं।

ध्रुवीकरण का 'सुपर गेम'

सियासी पंडित मान रहे हैं कि हुमायूं कबीर अब 'करो या मरो' की स्थिति में खेल रहे हैं। टीएमसी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाकर पल्ला झाड़ लिया है, इसलिए अब वो सीधे तौर पर अपने कोर वोटर को संबोधित कर रहे हैं।

"अयोध्या" का जिक्र करना और यह कहना कि "यहां बाबरी को कोई छू नहीं सकता", यह दर्शाता है कि वो भावनाओं को भड़काकर अपने पक्ष में गोलबंदी करना चाहते हैं। वो यह मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी लड़ाई सिर्फ एक मस्जिद बनाने की नहीं, बल्कि अपनी ताकत और वर्चस्व साबित करने की है।

पुलिस-प्रशासन के लिए सिरदर्द

हुमायूं कबीर के इस बयान ने स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग की नींद उड़ा दी है। 6 दिसंबर का दिन वैसे ही संवेदनशील होता है, और अब एक विधायक का ऐसा भड़काऊ चैलेंज देना कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कबीर ने पहले ही कह रखा है कि अगर उन्हें रोका गया, तो वो लाखों लोगों को सड़क पर उतार देंगे।

टीएमसी की चुप्पी और बीजेपी का वार

जहाँ एक तरफ कबीर आग उगल रहे हैं, वहीं टीएमसी अभी यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसका इस 'पागलपन' से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन अंदरखाने पार्टी भी डरी हुई है कि कहीं इस मुद्दे से पूरे राज्य में सांप्रदायिक तनाव न फैल जाए। उधर, बीजेपी को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह बंगाल में 'तुष्टीकरण' का असली चेहरा है, जहाँ एक नेता खुलेआम कानून को ठेंगा दिखा रहा है और संविधान की जगह अपनी मनमर्जी चला रहा है।

कुल मिलाकर, हुमायूं कबीर ने 'अयोध्या' का नाम लेकर चिंगारी तो फेंक दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन उनके इस चैलेंज को कैसे स्वीकार करता है क्या उन्हें रोका जाएगा, या बंगाल एक बार फिर सियासी ड्रामे का गवाह बनेगा?