झारखंड के युवाओं के लिए 2026 बनेगा नौकरियों वाला साल'? हेमंत सोरेन ने किया नए साल का सबसे बड़ा एलान
News India Live, Digital Desk : आज 31 दिसंबर 2025 की दोपहर है और चारों ओर नए साल के जश्न का शोर है। जहाँ दुनिया आतिशबाज़ी और पार्टियों की तैयारी कर रही है, वहीं झारखंड के हज़ारों-लाखों युवाओं की आँखों में सिर्फ एक ही सपना तैर रहा है "सरकारी नौकरी"। उन नौजवानों के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साल जाते-जाते एक ऐसा भरोसा दिया है, जो किसी तोहफे से कम नहीं है।
मुख्यमंत्री ने साफ़ शब्दों में कहा है कि साल 2026 'रोज़गार और नियुक्तियों का साल' होगा। चलिए जानते हैं कि आख़िर इस बार सरकार की झोली में छात्रों के लिए क्या खास है और यह घोषणा कितनी हकीकत बन पाएगी।
पुरानी कड़वाहट छोड़, नई उम्मीदों का साल
पिछले कुछ सालों में झारखंड के छात्र कई तरह की चुनौतियों से जूझे हैं—कभी पेपर लीक का डर, तो कभी कोर्ट-कचहरी में अटकी भर्तियां। लेकिन मुख्यमंत्री का यह ताज़ा बयान बताता है कि सरकार अब 'बैकलॉग' को खत्म कर 'फ्रेश नियुक्तियों' की रफ़्तार तेज़ करने वाली है। सीएम सोरेन का मानना है कि प्रदेश की असली ताक़त यहां के पढ़े-लिखे नौजवान हैं, और अगर उन्हें समय पर काम मिले, तभी 'नया झारखंड' साकार हो पाएगा।
किन विभागों में खुलने जा रहे हैं किस्मत के ताले?
अंदरूनी सूत्रों और आधिकारिक सुगबुगाहट की मानें तो 2026 में इन प्रमुख विभागों में नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज़ होगी:
- शिक्षा विभाग (Teachers Recruitment): हज़ारों की संख्या में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के पद भरने की तैयारी है।
- झारखंड पुलिस (Jharkhand Police Bharti): प्रदेश की सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए सिपाही और दारोगा पदों पर बड़ी भर्ती का खाका खिंच चुका है।
- JSSC और सचिवालय: कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के ज़रिए क्लर्क और सचिवालय सहायकों की वैकेंसी पर लगी रोक हटने की उम्मीद है।
पारदर्शिता पर होगा सबसे ज्यादा जोर
अक्सर छात्रों की एक ही शिकायत रहती है— "मेहनत हम करते हैं, पर सेटिंग बाजी मार ले जाती है।" इसी को ध्यान में रखते हुए, सरकार का कहना है कि 2026 की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता (Transparency) को नंबर-1 प्राथमिकता दी जाएगी। डिजिटल निगरानी और सख्त कानूनों के ज़रिए धांधली को रोकने की कोशिश होगी, ताकि दूर-दराज के गाँवों में बैठा गरीब का बेटा भी अपनी मेहनत के दम पर कुर्सी पा सके।
सिर्फ वादा है या इरादा भी?
राजनीतिक पंडितों की मानें तो हेमंत सोरेन सरकार का यह रुख न केवल युवाओं को लुभाने के लिए है, बल्कि प्रदेश के विकास की ज़रूरत भी है। स्कूलों में मास्टर नहीं हैं, थानों में फोर्स कम है और दफ्तरों में बाबू। ऐसे में अगर 2026 में ये पद भरे जाते हैं, तो यह प्रदेश की प्रशासनिक रीढ़ की हड्डी को भी मज़बूत करेगा।
छात्रों को क्या करना चाहिए?
नए साल की पहली किरण के साथ जश्न मनाना तो ठीक है, लेकिन झारखंड के जुझारू छात्रों को अब अपनी किताबों से धूल झाड़ देनी चाहिए। कैलेंडर जारी होने का इंतज़ार करने के बजाय अभी से सिलेबस को खंगालना शुरू करें। जब मंज़िल साफ दिख रही हो, तो सफर की तैयारी में ढिलाई ठीक नहीं।