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March 18 2026 04:25 pm

ईरान-अमेरिका युद्ध का 13वां दिन: मसूद पेजेशकियान ने दुनिया के सामने रखीं 3 बड़ी शर्तें, क्या थम जाएगी विनाशकारी जंग?

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तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व (Middle East) की धरती इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है। ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी इस भीषण जंग को 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन शांति की कोई किरण नजर नहीं आ रही है। स्ट्रेट ऑफ हर्मोज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी ने वैश्विक तेल बाजार में कोहराम मचा दिया है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमराने लगी है। इस बीच, रूस और पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कमान संभालते हुए ईरान को मनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

ईरान की 'ट्रिपल थ्रेट' शर्तें: जंग रोकने का आखिरी रास्ता?

जंग की विभीषिका के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बुधवार को बड़ा ऐलान करते हुए युद्ध विराम के लिए तीन सख्त शर्तें रखी हैं। पाकिस्तान और रूस के राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत के बाद पेजेशकियान ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका और इजराइल इन मांगों को नहीं मानते, तो संघर्ष खत्म होना नामुमकिन है।

ईरान की तीन मुख्य शर्तें:

तेहरान के वैध अधिकारों को मान्यता: अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान की संप्रभुता और अधिकारों को स्वीकार किया जाए।

भारी हर्जाने का भुगतान: युद्ध के कारण हुए नुकसान की भरपाई अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा की जाए।

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी: भविष्य में ईरान पर किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए पुख्ता अंतरराष्ट्रीय लिखित गारंटी दी जाए।

सोशल मीडिया पर जंग: पेजेशकियान ने अमेरिका-इजराइल को घेरा

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक कड़ा संदेश जारी किया है। उन्होंने इस संघर्ष को सीधे तौर पर "जायोनी शासन (इजराइल) और अमेरिका द्वारा भड़काया गया युद्ध" करार दिया। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी युद्ध नहीं चाहता था, बल्कि यह जंग उन पर थोपी गई है। तेहरान ने साफ किया कि वे क्षेत्रीय शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन अपने स्वाभिमान और सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे।

रूस और पाकिस्तान की एंट्री: क्या काम आएगी डिप्लोमेसी?

जब एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि "हम जंग जीत चुके हैं", वहीं दूसरी ओर पर्शियन गल्फ (Persian Gulf) में ईरान के हमलों की तीव्रता बढ़ती जा रही है। इस विरोधाभास के बीच रूस और पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रयास बेहद अहम माने जा रहे हैं। ये दोनों देश ईरान के करीबी सहयोगी रहे हैं और अब वे एक ऐसे 'मिडिल ग्राउंड' की तलाश कर रहे हैं जहाँ से ग्लोबल इकोनॉमी को और ज्यादा तबाह होने से बचाया जा सके।

दुनिया पर मंडराता तेल संकट

स्ट्रेट ऑफ हर्मोज बंद होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। अगर यह गतिरोध और कुछ दिन जारी रहा, तो भारत समेत कई एशियाई और यूरोपीय देशों में ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और पाकिस्तान की ये कवायद केवल ईरान को शांत करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बचाने की एक बड़ी मजबूरी भी है।