Parliament Session: क्या खत्म होगा कांग्रेस सांसदों का वनवास? निशिकांत दुबे ने बताए समझौते के 2 फॉर्मूले, आज हो सकता है बड़ा फैसला
News India Live, Digital Desk: संसद में पिछले कई दिनों से जारी गतिरोध अब खत्म होता नजर आ रहा है। भाजपा के फायरब्रांड सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि निलंबित किए गए कांग्रेस सांसदों की सदन में वापसी हो सकती है। उन्होंने एक्स (Twitter) पर एक पोस्ट साझा करते हुए उन दो प्रमुख शर्तों या बिंदुओं का खुलासा किया है, जिन पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी है।
निशिकांत दुबे ने गिनाए समझौते के 2 प्रमुख बिंदु
सांसद निशिकांत दुबे के अनुसार, सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इन दो बातों पर समझौता हुआ है:
तथ्यहीन बातों पर रोक: विपक्ष के नेता सदन में कोई भी अनर्गल, बेबुनियाद या तथ्यहीन बात नहीं करेंगे। चर्चा केवल ठोस तथ्यों और तर्कों के आधार पर होगी। इसके बदले में सत्ता पक्ष की ओर से भी शांतिपूर्ण व्यवहार का आश्वासन दिया गया है।
सदन की मर्यादा का पालन: विपक्षी सांसद वेल (Well) में आकर हंगामा नहीं करेंगे, कागज नहीं फाड़ेंगे और न ही लोकसभा के अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता करेंगे। मेज पर चढ़कर उत्पाद मचाने जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक रहेगी।
क्यों हुआ था सांसदों का निलंबन?
बता दें कि बजट सत्र के दौरान 'अशोभनीय व्यवहार' और सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में कांग्रेस के कई सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। इनमें मनिक्कम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, और गुरजीत सिंह औजला जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। ये सभी सांसद संसद के मकर द्वार पर लगातार धरना दे रहे थे।
लोकसभा अध्यक्ष की सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में इस गतिरोध को खत्म करने पर चर्चा हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू आज सदन में निलंबन वापसी का प्रस्ताव पेश कर सकते हैं। सरकार का रुख है कि लोकतंत्र में संवाद जरूरी है, लेकिन वह 'लक्ष्मण रेखा' के भीतर होना चाहिए।
विपक्ष का रुख: जनता के मुद्दों पर नहीं झुकेंगे
निलंबन वापसी की खबरों के बीच विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे सदन की मर्यादा का सम्मान करते हैं, लेकिन जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों (जैसे महंगाई और बेरोजगारी) पर अपनी आवाज बुलंद करना जारी रखेंगे।