आपका भी ट्रैफिक चालान पेंडिंग है? घबराइए नहीं, इसे ज़ीरो कराने का सुनहरा मौका आ गया है!

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आपके फोन पर भी आया है क्या ट्रैफिक चालान का वो मैसेज, जिसे देखकर आपका पूरा दिन खराब हो गया? ओवर-स्पीडिंग, रेड लाइट जंप या बिना हेलमेट के गाड़ी चलाने का हज़ारों रुपये का चालान... इसे भरने का ख्याल ही जेब पर भारी पड़ता है। ज़्यादातर लोग इसे या तो नज़रअंदाज़ कर देते हैं या फिर टेंशन में रहते हैं।

लेकिन अगर हम आपसे कहें कि आपके पास इस भारी-भरकम चालान को लगभग न के बराबर या बहुत ही कम रकम में निपटाने का एक सरकारी और कानूनी रास्ता है? जी हाँ, आपने बिल्कुल सही सुना! और इस जादुई रास्ते का नाम है - लोक अदालत (Lok Adalat)।

ये लोक अदालत आखिर है क्या?

चलिए, इसे बिलकुल आसान भाषा में समझते हैं। लोक अदालत, यानी 'लोगों की अदालत'। यह एक ऐसा मंच है जहाँ ट्रैफिक चालान, बिजली-पानी के बिल या छोटे-मोटे झगड़ों जैसे मामलों को आपसी सहमति से और बहुत जल्दी सुलझाया जाता है। यहाँ लंबे-लंबे कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

तो क्या चालान सच में ज़ीरो हो जाएगा?

यह सबसे बड़ा सवाल है! देखिए, "ज़ीरो" होना इस बात पर निर्भर करता है कि आपका चालान किस गलती के लिए और कितना सही है। अगर आप यह साबित कर पाते हैं कि चालान गलती से कट गया है, तो जज साहब उसे माफ भी कर सकते हैं।

लेकिन ज़्यादातर मामलों में, जज साहब आपकी स्थिति को समझते हुए चालान की रकम को बहुत ज़्यादा कम कर देते हैं। सोचिए, अगर आपका 10,000 रुपये का चालान सिर्फ 500 या 1000 रुपये देकर निपट जाए, तो इससे अच्छी बात क्या होगी!

तो करना क्या होगा? पूरा प्रोसेस समझिए

यह मौका साल में कुछ ही बार आता है, इसलिए सही जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और लगभग सभी राज्यों में समय-समय पर ट्रैफिक चालान के लिए खास लोक अदालत लगाई जाती है।

  1. तारीखों का पता लगाएं: सबसे पहले अपने राज्य की ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट या न्यूज़ पर नज़र रखें कि आपके शहर में अगली लोक अदालत कब लग रही है।
  2. अपॉइंटमेंट बुक करें: अब ज़्यादातर जगहों पर भीड़ से बचने के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट या स्लॉट बुकिंग करवानी पड़ती है। यह ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट पर होता है और बहुत आसान है।
  3. चालान की कॉपी निकालें: अपॉइंटमेंट लेने के बाद, आपको वेबसाइट से अपने सभी पेंडिंग चालान डाउनलोड करके उनका प्रिंटआउट लेना होगा।
  4. लोक अदालत पहुँचें: बताई गई तारीख और समय पर, अपने चालान की कॉपी और गाड़ी के कागज़ात (जैसे RC, लाइसेंस) लेकर बताई गई कोर्ट में पहुँच जाएं।
  5. जज के सामने अपनी बात रखें: जब आपका नंबर आए, तो आप जज साहब को अपनी परेशानी बता सकते हैं। वे आपकी बात सुनकर चालान पर एक डिस्काउंट वाली रकम तय कर देंगे।
  6. तुरंत भुगतान करें और टेंशन खत्म: आपको उसी समय मौके पर ही घटी हुई रकम का भुगतान करना होगा और आपका केस हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।

तो अगली बार जब ट्रैफिक चालान का मैसेज आए, तो टेंशन लेने के बजाय लोक अदालत की तारीख का इंतज़ार करें। यह आपके हज़ारों रुपये बचाने का सबसे सीधा और सरकारी तरीका है!