पाकिस्तान की हालत और खस्ता अब अपनी नेशनल एयरलाइन बेचने की नौबत, और खरीदार जानकर आप हैरान रह जाएंगे

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News India Live, Digital Desk : आपने वो कहावत तो सुनी होगी"जब जेब खाली हो, तो घर के बर्तन भी बेचने पड़ जाते हैं।" आज हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का कुछ ऐसा ही हाल है। आर्थिक संकट इस कदर गहरा गया है कि जिस 'PIA' (Pakistan International Airlines) को कभी देश की शान समझा जाता था, आज उसे कौड़ियों के दाम नीलाम किया जा रहा है। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नीलामी में जो नाम सामने आ रहा है, वो है फौजी फाउंडेशन। जी हाँ, पाकिस्तान की सेना से जुड़ा हुआ एक संगठन।

दिवालियापन या मज़ाक?

पाकिस्तान इस वक्त इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है। IMF (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड) से कर्ज़ा लेने के लिए उसे अपनी सरकारी संपत्तियों को प्राइवेट हाथों में सौंपना पड़ रहा है। PIA, जिस पर अरबों रुपयों का कर्जा है और जिसके जहाज शायद ही समय पर उड़ते हैं, सरकार के लिए एक बड़ा बोझ बन चुकी है। सरकार इसे जल्द से जल्द बेचकर अपनी जान छुड़ाना चाहती है, ताकि कुछ पैसे आए और मुल्क चल सके।

लेकिन असली कहानी यहां शुरू होती है। जब देश बिकने की कगार पर है, तो उसे बचाने या खरीदने के लिए कौन आगे आया? खबरों के मुताबिक, इस रेस में 'फौजी फाउंडेशन' भी शामिल है। ये वही संस्था है जिसे पाकिस्तानी आर्मी चलाती है।

सेना का बिजनेस या देश की सुरक्षा?

आम लोग और दुनिया के विशेषज्ञ इस बात पर हैरान हैं। पाकिस्तान की जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, बिजली-पानी और आटे के लिए तरस रही है, और वहां की सेना, जिसका काम सीमाओं की सुरक्षा करना है, अब बिजनेस में अपना दायरा बढ़ा रही है।

सोशल मीडिया और दबी जुबान में वहां के लोग सवाल पूछ रहे हैं कि अगर देश की इकोनॉमी डूब रही है, तो आर्मी की संस्थाओं के पास एयरलाइन खरीदने के लिए पैसा कहाँ से आ रहा है? यह पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान के लिए एक अजीब और शर्मिंदा करने वाली स्थिति बन गई है कि एक तरफ सरकार दुनिया भर से भीख मांग रही है, और दूसरी तरफ देश के अंदर ही सत्ता के केंद्र (Establishment) इतनी मज़बूत है कि वो गिरती हुई नेशनल एयरलाइन को भी खरीदने की ताकत रखती है।

आम जनता पर क्या असर?

इस नीलामी का पाकिस्तान के आम नागरिक पर सीधा असर भले न दिखे, लेकिन यह दर्शाता है कि वहां का सिस्टम पूरी तरह लाचार हो चुका है। PIA, जो कभी दुनिया की बेहतरीन एयरलाइंस को टक्कर देती थी, आज अपने वजूद को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में फौजी फाउंडेशन की दिलचस्पी ने यह साफ़ कर दिया है कि पाकिस्तान में 'पावर' किसके हाथ में है।

यह नीलामी सिर्फ एक एयरलाइन का सौदा नहीं है, यह पाकिस्तान के मौजूदा हालात का वो सच है जिसे वो छुपाना भी चाहे तो छुपा नहीं सकता।