योगी का मास्टरस्ट्रोक गौशाला संचालकों की दुकान बंद? भूसा और चारे के दाम तय, देखिये अब क्या क्या मिलेगा
News India Live, Digital Desk: अब यूपी की गौशालाओं में 'क्या खिलाना है' और 'कितने का खिलाना है', दोनों का स्टैंडर्ड तय कर दिया गया है। यानी अब कोई भी मैनेजर या अधिकारी अपनी मर्जी से चारा खरीदने के नाम पर बिल बनाकर पैसा पास नहीं करवा पाएगा।
आखिर नया नियम क्या है?
आसान भाषा में समझें तो सरकार ने गायों की 'डाइट' (Diet) फिक्स कर दी है। अब एक गाय या गोवंश को दिन भर में कितना भूसा, कितना हरा चारा और कितना दाना (पौष्टिक आहार) देना है, इसकी मात्रा तय हो गई है। यह इसलिए ज़रूरी था क्योंकि अक्सर कागज पर तो भरपेट खाना दिखाया जाता था, लेकिन असल में जानवरों को आधा पेट ही मिल रहा था।
कीमतें (Rates) भी हुईं लॉक
भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा खरीदारी में होता है। मान लीजिये भूसा मार्किट में 500 रुपये का है, तो कुछ लोग बिल 800 रुपये का बनवा लेते थे। इसी 'खेल' को रोकने के लिए प्रशासन ने अब चारे, भूसे और दाने की खरीद का अधिकतम रेट (Price Cap) तय कर दिया है।
अब गौशाला संचालकों को उसी तय रेट के अंदर ही सामान खरीदना होगा। अगर वे इससे महंगा खरीदते हैं, तो उन्हें जवाब देना पड़ेगा।
गायों की सेहत पर होगा असर
यह फैसला सिर्फ पैसों की बचत के लिए नहीं, बल्कि बेसहारा पशुओं की जान बचाने के लिए भी बहुत ज़रूरी था। सही मात्रा में और सही क्वालिटी का खाना मिलने से गौशालाओं में गायों के बीमार पड़ने या कुपोषण से मरने की घटनाएं कम होंगी। विशेषकर ठंड और बरसात के मौसम में जब चारे की कमी हो जाती है, यह नया नियम गायों के लिए जीवनरक्षक साबित होगा।
जनता की नज़र में सही कदम
ईमानदारी से देखें तो यह कदम बहुत पहले ही उठाया जाना चाहिए था। यह जनता के टैक्स का पैसा है जो गौ-सेवा के नाम पर दिया जाता है। अगर यह पैसा सही जगह यानी गायों के पेट में जाए, न कि भ्रष्ट सिस्टम की जेब में, तो ही 'गौ-रक्षा' का असली मकसद पूरा होगा।
अब देखना यह होगा कि ज़मीन पर अधिकारी इस नियम का कितनी कड़ाई से पालन करते हैं। लेकिन शुरुआत तो दमदार हुई है!