Yoga for Hip and Chest Mobility 2026: कूल्हों और छाती की गतिशीलता बढ़ाने के लिए 9 असरदार योगासन

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नई दिल्ली। हमारे शरीर का संतुलन मुख्य रूप से दो केंद्रों पर टिका होता है-कूल्हे (Hips), जो शरीर की नींव हैं, और छाती (Chest), जो हमारे श्वसन और ऊर्जा का केंद्र है। जब ये दोनों अंग स्वतंत्र रूप से हिलते-डुलते हैं, तो शरीर में रक्त संचार और ऑक्सीजन का प्रवाह सुचारू रहता है। कूल्हों की जकड़न जहाँ हमारे चलने और बैठने के तरीके को बिगाड़ देती है, वहीं छाती का जकड़ना सांस लेने में कठिनाई और कंधे के झुकाव का कारण बनता है। योग के माध्यम से इन दोनों हिस्सों में सामंजस्य बहाल कर हम एक ऊर्जावान और संतुलित जीवन जी सकते हैं।

कूल्हे और छाती की गतिशीलता क्यों है जरूरी?

कूल्हे हमें चलने, दौड़ने और वजन संभालने की शक्ति देते हैं। वहीं, छाती और ब्रेस्ट क्षेत्र की मांसपेशियां फेफड़ों के विस्तार और ऊपरी शरीर के सही संरेखण (Alignment) के लिए जिम्मेदार हैं। जब ये दोनों अंग खुले और सक्रिय होते हैं, तो रीढ़ की हड्डी पर दबाव कम होता है और पूरे शरीर का समन्वय (Coordination) बेहतर होता है।

शरीर का प्रवाह सुधारने वाले 9 प्रमुख योगासन

ताड़ासन (हृदय को ऊपर उठाते हुए): यह शरीर को सही मुद्रा में खड़े होना सिखाता है। छाती को ऊपर उठाने से रक्त संचार सुधरता है और कूल्हों को सक्रिय रखने से स्थिरता आती है।

देवी मुद्रा (Goddess Pose): यह जांघों और नितंबों को मजबूत करती है। छाती और कंधों को चौड़ा रखने से शरीर का निचला और ऊपरी हिस्सा एक साथ संतुलित होता है।

चेस्ट ओपनिंग लो लंज: यह कूल्हे की मांसपेशियों को गहराई से खींचता है। बाहों को ऊपर उठाकर पसलियों को फैलाने से सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है।

सेतुबंधासन (Bridge Pose): यह कूल्हों को सक्रिय करता है और छाती को धीरे-धीरे खोलता है। यह रीढ़ की हड्डी को सही स्थिति में लाने के लिए बेहतरीन है।

वीरभद्रासन II (Warrior II): यह ताकत और खुलेपन का सही मिश्रण है। यह कूल्हों को स्थिर करता है और छाती को खुला रखकर आत्मविश्वास और समन्वय बढ़ाता है।

उष्ट्रासन (Camel Pose): यह छाती को गहराई से खोलने वाला आसन है। यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है और ऊपरी शरीर में ऊर्जा का संचार करता है।

बैठकर तितली आसन (Butterfly Pose): सीधी रीढ़ के साथ बैठने से श्रोणि (Pelvis) की अकड़न दूर होती है और छाती को फैलने का मौका मिलता है।

उत्थित पार्श्वकोणासन (Extended Side Angle): यह शरीर के किनारों को लंबा करता है और कूल्हों को मजबूत बनाता है, जिससे आप हल्का और लचीला महसूस करते हैं।

भुजंगासन (Cobra Pose): यह पीठ के निचले हिस्से को मजबूती देता है और छाती को ऊपर उठाकर श्वसन तंत्र को बेहतर बनाता है।

बेहतर शारीरिक प्रवाह के लिए 3 गोल्डन टिप्स

सहज गति: एक आसन से दूसरे आसन में जाते समय झटके न दें। धीमी और नियंत्रित गति ही मांसपेशियों को सुरक्षित रूप से खोलती है।

सांस का जादू: हर मूवमेंट को अपनी सांस के साथ जोड़ें। सांस अंदर लेते समय छाती को विस्तार दें और बाहर छोड़ते समय मांसपेशियों को रिलैक्स करें।

हृदय पर ध्यान: अभ्यास के दौरान कंधों को पीछे धकेलने के बजाय हृदय (Chest Center) को ऊपर उठाने पर ध्यान दें। इससे आपके पॉश्चर में प्राकृतिक सुधार आएगा।