Wrist Strengthening Yoga: टाइपिंग और दिन भर के काम से कलाइयों में होता है दर्द? इन 9 योगासनों से बनाएं उन्हें लोहे जैसा मजबूत

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लखनऊ। आज के डिजिटल युग में हमारा अधिकांश समय कीबोर्ड पर टाइपिंग करने, माउस चलाने या मोबाइल स्क्रॉल करने में बीतता है। इन गतिविधियों का सबसे अधिक दबाव हमारी कलाइयों (Wrists) पर पड़ता है। कमजोर कलाइयां न केवल रोजमर्रा के कामों में बाधा डालती हैं, बल्कि योगाभ्यास के दौरान 'डाउनवर्ड डॉग' या 'प्लैंक' जैसे आसनों में भी दर्द का कारण बनती हैं।

योग विज्ञान के अनुसार, कलाइयों की मजबूती केवल जोड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी उंगलियों से लेकर अग्रबाहु (Forearms) तक की मांसपेशियों के तालमेल पर निर्भर करती है। यहाँ 9 ऐसे योगासन दिए गए हैं जो आपकी कलाइयों को सुरक्षित रूप से मजबूत और लचीला बनाएंगे।

कलाइयों की मजबूती के लिए 9 प्रभावी योगासन

1. टेबलटॉप पोज़ (Tabletop Pose)

यह शुरुआत करने के लिए सबसे सुरक्षित आसन है। घुटनों और हाथों के बल आने पर कलाइयों पर शरीर का हल्का और नियंत्रित भार पड़ता है। हथेलियों को जमीन पर मजबूती से दबाने से स्थिरता बढ़ती है।

2. टेबलटॉप रिस्ट सर्कल्स (Wrist Circles)

टेबलटॉप स्थिति में रहते हुए अपने शरीर के वजन को कलाइयों के चारों ओर गोलाकार दिशा में घुमाएं। यह जोड़ों में प्राकृतिक चिकनाई (Lubrication) पैदा करता है और जकड़न को दूर करता है।

3. अधोमुख श्वानासन (Downward Facing Dog)

इसमें शरीर का वजन हाथों और पैरों के बीच विभाजित होता है। यह कलाइयों की सहनशक्ति (Stamina) बढ़ाने और हाथों की छोटी मांसपेशियों को सक्रिय करने के लिए बेहतरीन है।

4. फलकासन (Plank Pose)

प्लैंक पोज़ न केवल कोर को मजबूत करता है, बल्कि यह कलाई के जोड़ों के लिए एक 'स्टेबिलिटी टेस्ट' जैसा है। थोड़े समय के लिए इस मुद्रा में रुकना कलाइयों को भारी वजन उठाने के लिए तैयार करता है।

5. वशिष्ठासन (Side Plank Pose)

यह एक चुनौतीपूर्ण आसन है क्योंकि इसमें शरीर का पूरा वजन एक ही कलाई पर होता है। यह कलाई के पार्श्व (Side) हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करता है और संतुलन में सुधार लाता है।

6. चतुरंग दंडासन (Four-Limbed Staff Pose)

इस आसन को धीरे-धीरे करने से कलाइयों और कोहनियों में जबरदस्त ताकत आती है। यह उन्नत स्तर के योगासनों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।

7. डॉल्फिन पोज़ (Dolphin Pose)

यदि आपकी कलाइयों में पहले से हल्का दर्द है, तो यह आसन आपके लिए है। इसमें वजन अग्रबाहुओं (Forearms) पर होता है, जिससे कलाइयों को आराम मिलता है लेकिन आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

8. ऊर्ध्व मुख श्वानासन (Upward Facing Dog)

यह आसन कलाइयों के विस्तार (Extension) की क्षमता को सुधारता है। हाथों से फर्श को सक्रिय रूप से धकेलना कलाई के जोड़ों की सुरक्षा करता है।

9. रिवर्स टेबलटॉप पोज़ (Reverse Tabletop)

यह कलाई के लचीलेपन और ताकत का एक अलग कोण से परीक्षण करता है। यह कंधों को खोलता है और कलाइयों के पिछले हिस्से की मांसपेशियों को सक्रिय करता है।

अभ्यास के दौरान इन 3 बातों का रखें खास ध्यान

भार का वितरण: कलाई पर दबाव कम करने के लिए केवल हथेली के निचले हिस्से पर जोर न दें, बल्कि अपनी उंगलियों के पोरों (Knuckles) से भी जमीन को दबाएं।

वार्म-अप: किसी भी आसन को करने से पहले कलाइयों को 10-12 बार क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज जरूर घुमाएं।

दर्द की सुनें: यदि किसी भी आसन के दौरान 'तेज चुभन' महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं।