काम बनते-बनते बिगड़ रहे हैं? तिलकुंद चतुर्थी पर बप्पा को चढ़ाएं ये एक खास चीज़, बदल जाएगी किस्मत

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News India Live, Digital Desk: जनवरी की गुलाबी ठंड और माघ महीने की पावन शुरुआत के साथ ही आ गई है तिलकुंद चतुर्थी। हिंदू धर्म में इसे बहुत ही फलदायी माना जाता है। बहुत से लोग इसे सकट चौथ या तिलकुटा चौथ के नाम से भी जानते हैं। यह दिन मुख्य रूप से संकटों को दूर करने वाले गणपति बप्पा को समर्पित है।

अगर आपको लगता है कि आपकी मेहनत का पूरा फल आपको नहीं मिल रहा या करियर में बार-बार रुकावटें आ रही हैं, तो इस साल की तिलकुंद चतुर्थी आपके लिए एक सुनहरा मौका है।

आज तिल का इतना महत्व क्यों है?
जैसा कि नाम से ही पता चलता है 'तिल-कुंद'। आज के दिन भगवान गणेश को तिल और गुड़ का भोग लगाना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि माघ के इस महीने में तिल का दान और उपयोग करने से पुराने पापों का नाश होता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। बप्पा को तिल के लड्डू चढ़ाना उन्हें प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय
तिलकुंद चतुर्थी की पूजा में चंद्रमा का बहुत बड़ा रोल होता है। बिना चांद को अर्घ्य दिए यह व्रत या पूजा अधूरी मानी जाती है। 2026 में चतुर्थी तिथि के अनुसार शाम का समय पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ है। चंद्रोदय (Moonrise) का समय रात में 8:15 से 8:45 (संभावित) के बीच रहेगा। Note: अपने शहर के सटीक समय के लिए पंचांग जरूर चेक कर लें।

सफलता के लिए 'गुरु' (Jupiter) के खास उपाय
भगवान गणेश को 'बुद्धि का देवता' कहा जाता है। ज्योतिष की मानें तो जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह (Jupiter) कमजोर होता है, उन्हें काम में सफलता मिलने में काफी मुश्किलें आती हैं। आज के दिन आप ये 3 काम करके अपने गुरु को मज़बूत कर सकते हैं:

  1. हल्दी का तिलक: गणेश जी को पीली हल्दी चढ़ाएं और फिर उसी से अपने माथे पर तिलक करें।
  2. पीली वस्तुओं का दान: आज के दिन तिल के साथ-साथ चने की दाल या पीली मिठाई का दान करना आपके करियर के बंद रास्ते खोल सकता है।
  3. मंत्र जाप: 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप कम से कम 108 बार करें। यह मंत्र न सिर्फ आपके मन को शांत करेगा बल्कि आपकी निर्णय लेने की क्षमता को भी बढ़ाएगा।

पूजा की सरल विधि

  • सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और बप्पा के सामने व्रत या पूजा का संकल्प लें।
  • शाम को भगवान गणेश की प्रतिमा को पीले फूलों और दूर्वा (घास) से सजाएं।
  • उन्हें तिल और गुड़ का नैवेद्य चढ़ाएं।
  • रात को चंद्रमा निकलने पर जल में थोड़ा दूध और अक्षत डालकर अर्घ्य दें।

बप्पा बहुत दयालु हैं, वे सिर्फ़ दिखावे से नहीं बल्कि आपके भाव से प्रसन्न होते हैं। उम्मीद है कि यह तिलकुंद चतुर्थी आपके जीवन के सभी विघ्नों को दूर कर देगी