बिहार में क्या खत्म होगी शराबबंदी? अपनों (NDA) ने ही घेरे सुशासन बाबू जेडीयू ने समीक्षा की मांग पर दिखाई लाल आंख
News India Live, Digital Desk : बिहार की सियासत में इन दिनों 'शराब' पर घमासान छिड़ा हुआ है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस कानून को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं, वहीं उनके गठबंधन के साथी अब इसे बदलने या इसकी समीक्षा (Review) करने का दबाव बना रहे हैं।
1. सहयोगियों का 'विद्रोह' (NDA Allies Demand)
एनडीए के भीतर से उठी इन आवाजों ने सरकार के लिए 'धर्मसंकट' पैदा कर दिया है:
आरएलएम (RLM) की मांग: उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक माधव आनंद ने विधानसभा में सीधे मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कहा कि अब इस कानून की विस्तृत समीक्षा का समय आ गया है। उन्होंने दलील दी कि कानून तो है, लेकिन शराब की 'होम डिलीवरी' धड़ल्ले से जारी है।
जीतन राम मांझी (HAM): केंद्रीय मंत्री मांझी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस कानून की वजह से गरीब और वंचित तबके के करीब 3.5 से 4 लाख लोग मुकदमों में फंसे हैं। उन्होंने इसे राजस्व का भारी नुकसान और भ्रष्टाचार का जरिया बताया।
उपेंद्र कुशवाहा: उनकी पार्टी का मानना है कि केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि जागरूकता और जमीनी हकीकत को देखकर इसमें संशोधन होना चाहिए।
2. जेडीयू (JDU) का कड़ा जवाब: "समीक्षा का सवाल ही नहीं"
सहयोगियों के इस रुख पर जेडीयू ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है:
विजय कुमार चौधरी (मंत्री): उन्होंने सदन में दो टूक कहा, "शराबबंदी सबकी सहमति से लागू हुई थी। यह लागू है और आगे भी रहेगी। समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं उठता।"
नीरज कुमार (प्रवक्ता): जेडीयू ने समीक्षा की मांग को 'हास्यास्पद' बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और समाज में सुधार हुआ है।
3. विवाद के 3 मुख्य कारण (Why the rift?)
| कारण | सहयोगी दलों का पक्ष | जेडीयू का पक्ष |
|---|---|---|
| राजस्व | शराबबंदी से सालाना करोड़ों का नुकसान हो रहा है। | महिलाओं और परिवारों की खुशहाली राजस्व से बढ़कर है। |
| भ्रष्टाचार | पुलिस और माफिया की मिलीभगत से होम डिलीवरी हो रही है। | कानून तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी है। |
| नया नशा | शराब न मिलने से युवा स्मैक और ड्रग्स की ओर बढ़ रहे हैं। | यह सामाजिक बुराई है, जिसे जड़ से खत्म करना होगा। |
विपक्ष का तंज: "कागजों पर है शराबबंदी"
इस बीच, विपक्ष (AIMIM और अन्य दलों) ने भी सरकार को घेरा है। AIMIM विधायक अख्तरुल इमान ने आरोप लगाया कि सरकार शराब माफिया को संरक्षण दे रही है और पूरी व्यवस्था फेल हो चुकी है।