जनरल नरवणे की किताब'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी पर क्यों फंसा पेंच? जब 4 साल में 34 किताबों को मिली हरी झंडी

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News India Live, Digital Desk: भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की संस्मरण पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' (Four Stars of Destiny) इन दिनों रक्षा गलियारों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सवाल उठ रहा है कि पिछले चार वर्षों में जहां सरकार ने विभिन्न अधिकारियों की 34 पुस्तकों को बिना किसी बड़े विवाद के मंजूरी दे दी, वहीं पूर्व सेना प्रमुख की इस किताब को गहन समीक्षा (Scrutiny) से क्यों गुजरना पड़ रहा है?

क्या है विवाद की असली जड़?

सूत्रों के मुताबिक, इस किताब में अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) और लद्दाख में एलएसी (LAC) पर चीन के साथ हुए गतिरोध जैसे संवेदनशील विषयों का जिक्र किया गया है। रक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुसार, सेवा में रहे या सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों को अपनी पुस्तक में ऐसी कोई भी जानकारी साझा करने से पहले क्लीयरेंस लेना अनिवार्य है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेशी संबंधों को प्रभावित कर सकती हो।

आंकड़ों का गणित: 34 बनाम 1

एक हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि 2017 से अब तक रक्षा मंत्रालय ने लगभग 34 सैन्य अधिकारियों की किताबों को प्रकाशन की अनुमति दी है। ऐसे में जनरल नरवणे की किताब पर उठ रहे सवालों ने कई कयासों को जन्म दे दिया है:

संवेदनशीलता: क्या अग्निपथ योजना पर जनरल के विचार सरकार के आधिकारिक पक्ष से अलग हैं?

प्रोटोकॉल: क्या प्रकाशन से पहले आवश्यक 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) की प्रक्रिया में कोई तकनीकी चूक हुई?

ऑपरेशनल सीक्रेसी: क्या पूर्वी लद्दाख की घटनाओं का विवरण सैन्य गोपनीयता के दायरे में आता है?

पब्लिशर्स और पाठकों में उत्सुकता

किताब के प्रकाशकों ने पहले ही इसकी प्री-बुकिंग शुरू कर दी थी, लेकिन फिलहाल इसकी रिलीज पर 'होल्ड' लगा हुआ है। रक्षा विशेषज्ञ इसे एक सामान्य समीक्षा प्रक्रिया मान रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे अभिव्यक्ति की आजादी और पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं।

नियम क्या कहते हैं?

केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम के तहत, संवेदनशील संगठनों में काम कर चुके अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद कुछ भी प्रकाशित करने से पहले संबंधित विभाग की अनुमति लेनी होती है। जनरल नरवणे के मामले में, समीक्षा समिति इस बात की जांच कर रही है कि क्या पुस्तक का कोई अंश आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) का उल्लंघन तो नहीं करता।