Population Debate : भारत में कभी हिंदुओं से ज्यादा नहीं होगी मुस्लिम आबादी ओवैसी ने आंकड़ों के साथ दावों को नकारा
News India Live, Digital Desk: हैदराबाद के सांसद असदउद्दीन ओवैसी ने जनसंख्या असंतुलन के नैरेटिव पर पलटवार किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत में मुस्लिम आबादी कभी भी हिंदुओं की संख्या को पार नहीं करेगी, क्योंकि सभी समुदायों में प्रजनन दर (Fertility Rate) तेजी से गिर रही है।
1. ओवैसी के मुख्य तर्क (Key Arguments)
ओवैसी ने अपने संबोधन में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें कहीं:
प्रजनन दर में गिरावट: उन्होंने सरकार के अपने आंकड़ों (NFHS) का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिमों में प्रजनन दर में सबसे अधिक गिरावट देखी गई है।
बराबरी असंभव: उन्होंने तर्क दिया कि सांख्यिकीय रूप से यह संभव ही नहीं है कि मुस्लिम आबादी हिंदुओं की विशाल जनसंख्या के बराबर पहुँच जाए या उससे आगे निकल जाए।
राजनीतिक नैरेटिव: ओवैसी के अनुसार, जनसंख्या का डर केवल ध्रुवीकरण और चुनावी लाभ के लिए फैलाया जाता है।
2. आंकड़ों की हकीकत (NFHS-5 के अनुसार)
भारत सरकार के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़े ओवैसी के तर्कों का समर्थन करते दिखते हैं:
| समुदाय | NFHS-4 (TFR) | NFHS-5 (TFR) | गिरावट (%) |
|---|---|---|---|
| हिंदू | 2.1 | 1.9 | - |
| मुस्लिम | 2.6 | 2.3 | सबसे तेज गिरावट |
| ईसाई | 2.0 | 1.8 | - |
3. 'रिप्लेसमेंट लेवल' का महत्व
जनसंख्या विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) अब 2.0 पर आ गई है, जो 'रिप्लेसमेंट लेवल' (2.1) से भी नीचे है।
इसका मतलब है कि भविष्य में भारत की जनसंख्या बढ़ने के बजाय स्थिर होने और फिर घटने लगेगी।
ओवैसी ने इसी 'डेमोग्राफिक ट्रेंड' का उपयोग करते हुए उन दावों को 'मिथक' बताया जो जनसंख्या असंतुलन की बात करते हैं।
4. ओवैसी का सरकार पर निशाना
सांसद ने यह भी कहा कि सरकार को जनसंख्या पर डर फैलाने के बजाय युवाओं को रोजगार देने और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्यों में प्रस्तावित 'जनसंख्या नीति' की भी आलोचना की और इसे असंवैधानिक बताया।