ब्रिटिश चुनाव में मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए PM मोदी का इस्तेमाल, ग्रीन पार्टी के उर्दू वीडियो पर क्यों मचा बवाल?
News India Live, Digital Desk: ब्रिटेन की राजनीति से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। वहां हो रहे एक महत्वपूर्ण उपचुनाव (UK By-election) में मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि का सहारा लिया गया है। ग्रीन पार्टी (Green Party) द्वारा जारी एक उर्दू विज्ञापन/वीडियो ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और स्थानीय राजनीति के बीच एक नई बहस छेड़ दी है, जिसकी लेबर पार्टी ने कड़ी निंदा की है।
क्या है पूरा विवाद? उर्दू वीडियो में क्या दिखाया गया?
ब्रिटेन के इस उपचुनाव में ग्रीन पार्टी ने मुस्लिम मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए एक कैंपेन वीडियो जारी किया है, जो पूरी तरह उर्दू भाषा में है।
वीडियो का कंटेंट: इस वीडियो में पीएम मोदी की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। वीडियो के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सत्ताधारी दल या अन्य विरोधी दल (जैसे लेबर पार्टी) उन विदेशी नेताओं और नीतियों का समर्थन करते हैं, जो मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ हो सकते हैं।
आइडेंटिटी पॉलिटिक्स का आरोप: ग्रीन पार्टी पर आरोप लग रहा है कि वह मतदाताओं को स्थानीय मुद्दों के बजाय "विदेशी चेहरों" और "धार्मिक पहचान" के आधार पर बांटने की कोशिश कर रही है।
लेबर पार्टी का कड़ा प्रहार: "यह समाज को बांटने वाली राजनीति है"
इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्षी लेबर पार्टी (Labour Party) ने ग्रीन पार्टी को आड़े हाथों लिया है।
मिश्रा की आलोचना: लेबर पार्टी के प्रतिनिधि मिश्रा ने कहा कि मुस्लिम वोटरों को साधने के चक्कर में विदेशी नेताओं (जैसे पीएम मोदी) और ब्रिटिश नेताओं (जैसे डेविड लैमी) की तस्वीरें दिखाकर ग्रीन पार्टी एक खतरनाक खेल खेल रही है।
संदेश का जोखिम: लेबर पार्टी का मानना है कि यह वीडियो समाज को केवल 'आइडेंटिटी पॉलिटिक्स' (पहचान की राजनीति) तक सीमित कर देगा, जिससे सामाजिक ताना-बाना खतरे में पड़ सकता है।
सुरक्षा और इज्जत: वीडियो में यह दावा किया गया है कि विपक्षी दल इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देते हैं और प्रवासियों पर टैक्स बढ़ाकर उनकी सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, जबकि ग्रीन पार्टी ऐसा नहीं होने देगी।
ब्रिटिश राजनीति में 'विदेशी नेताओं' की एंट्री क्यों?
यह पहली बार नहीं है जब ब्रिटेन के चुनाव में भारत या पीएम मोदी का जिक्र हुआ हो।
बड़ा वोट बैंक: ब्रिटेन में भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है, जो चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
रणनीतिक ध्रुवीकरण: दल अक्सर ऐसे संवेदनशील मुद्दों या चेहरों का इस्तेमाल करते हैं जिनसे किसी विशेष समुदाय की भावनाओं को जोड़ा जा सके।
आगे क्या हो सकता है?
इस विवाद के बाद ग्रीन पार्टी पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन या समाज में विद्वेष फैलाने के आरोपों की जांच की मांग उठ सकती है। वहीं, भारतीय कूटनीतिक हलकों में भी इस बात की चर्चा है कि कैसे एक घरेलू चुनाव में भारत के शीर्ष नेतृत्व की छवि को घसीटा जा रहा है।