India's New Naval Policy : F-35 काउंटर से भी आगे, क्यों काकेशस में पहुँच रहे भारतीय युद्धपोत?

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News India Live, Digital Desk: India's New Naval Policy : पिछले कुछ समय से भारत अपनी नौसैनिक क्षमताओं को तेज़ी से बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में, हाल ही में भारतीय नौसेना ने भूमध्य सागर से लेकर काकेशस (काला सागर के पास) तक, तुर्की के क़रीब अपने युद्धपोत भेजे। इस तैनाती ने दुनियाभर में कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है, खासकर तब जब इन क्षेत्रों में भारत के रणनीतिक हित बढ़ते जा रहे हैं। आख़िर भारत ये सब क्यों कर रहा है, और तुर्की के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच इन देशों से भारत को क्या मदद मिल रही है?

भारत क्यों बढ़ा रहा है अपनी समुद्री ताकत?

हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी और पाकिस्तान के साथ क्षेत्रीय तनाव ने भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा पर गंभीरता से सोचने को मजबूर किया है। अपनी अर्थव्यवस्था और व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर होने के कारण, भारतीय नौसेना को अब सिर्फ़ हिंद महासागर ही नहीं, बल्कि उसके रणनीतिक पड़ोसियों तक अपनी पहुँच बढ़ानी होगी। इसी दूरदर्शिता के तहत भारतीय नौसेना दुनिया के विभिन्न सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है, और यह भूमध्य सागर और काकेशस की तैनाती इसी का हिस्सा है। इसका मक़सद साफ़ है - भारत अपनी बढ़ती शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है और यह बता रहा है कि वह क्षेत्र में एक प्रमुख समुद्री शक्ति के तौर पर उभर रहा है।

तुर्की से संबंधों में कड़वाहट और क्षेत्रीय साझेदारियाँ

तुर्की और भारत के संबंध पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण रहे हैं। तुर्की लगातार कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है और भारत के अंदरूनी मामलों में टिप्पणी भी करता रहा है। ऐसे में भारतीय नौसेना का तुर्की के इतने करीब युद्धपोत भेजना एक बड़ा कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है। भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपनी उपस्थिति दर्शा रहा है और यह भी दिखा रहा है कि वह अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

यहाँ कुछ ऐसे देश हैं, जो भारत को इन संवेदनशील क्षेत्रों में अपना दबदबा बढ़ाने में मदद कर रहे हैं:

  1. यूनान (Greece): भारत और यूनान ने अपने रणनीतिक संबंधों को काफी मजबूत किया है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ रहा है, जिसमें संयुक्त नौसैनिक अभ्यास भी शामिल हैं। यूनान का रणनीतिक स्थान भारत को भूमध्य सागर तक पहुँचने और अपनी शक्ति प्रोजेक्ट करने में मदद करता है।
  2. साइप्रस (Cyprus): साइप्रस भी भूमध्य सागर में एक महत्वपूर्ण भागीदार है। भारत और साइप्रस के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ रहा है, जो भारत को पूर्वी भूमध्य सागर में अपनी नौसैनिक पहुँच बनाने में सहायता करता है।
  3. अरब अमीरात (UAE): संयुक्त अरब अमीरात भारतीय नौसेना के लिए एक प्रमुख भागीदार रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में इसकी भौगोलिक स्थिति भारत के समुद्री संचार की महत्वपूर्ण रेखाओं (SLOC) की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। UAE के बंदरगाह और रसद क्षमताएँ भारतीय नौसेना को अपनी लंबी दूरी की तैनाती में मदद करती हैं।
  4. मिस्र (Egypt): मिस्र स्वेज़ नहर के रणनीतिक महत्व के कारण भूमध्य सागर और हिंद महासागर को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत और मिस्र के बीच भी रक्षा सहयोग बढ़ा है, जिससे भारत को क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिलता है।

आगे क्या?

इन तैनातियों से यह संकेत मिलता है कि भारत अब सिर्फ़ अपने तत्काल पड़ोसी क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी नौसैनिक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है। यह क़दम आने वाले समय में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और वैश्विक समुद्री राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है।