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April 21 2026 11:18 am

सर्दियों में क्यों अचानक बजने लगते हैं कान? अगर आपने इन्हें ढका नहीं, तो गले और सिरदर्द की खैर नहीं

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News India Live, Digital Desk: जब तापमान गिरता है, तो हम अपनी छाती और गले को तो मफलर से ढंक लेते हैं, लेकिन कानों को हवा के रहमो-करम पर छोड़ देते हैं। कानों की बनावट ऐसी होती है कि इसमें न तो फैट की सुरक्षा होती है और न ही बहुत ज्यादा मांसपेशियां। ऐसे में सीधी पड़ने वाली बर्फीली हवा आपके शरीर के 'कंट्रोल रूम' यानी कानों को तुरंत ठंडा कर देती है।

कानों का बाकी शरीर से क्या रिश्ता है?

शायद आप यह जानकर हैरान रह जाएं कि आपके कान, नाक और गला आपस में एक बारीक नली से जुड़े होते हैं, जिसे 'यूस्टेशियन ट्यूब' कहते हैं।

  1. गले और नाक पर असर: जब बाहर की ठंडी हवा सीधे कानों में जाती है, तो यह न केवल कान में दर्द पैदा करती है, बल्कि इस नली के जरिए आपके गले और नाक के दबाव को भी बिगाड़ देती है। कई बार लोगों को लगता है कि उन्हें गले में संक्रमण (Infection) हो गया है, जबकि समस्या की जड़ ठंडे कान होते हैं।
  2. सिरदर्द और माइग्रेन: कान की नसों का सीधा संबंध आपके मस्तिष्क के उस हिस्से से होता है जो दर्द महसूस कराता है। ज्यादा ठंड लगने से नसों में सूजन आ सकती है, जिससे तेज सिरदर्द या 'ब्रेन फ्रीज' जैसा महसूस होता है।
  3. जबड़े का दर्द: क्या आपको भी सर्दियों में अचानक दांतों या जबड़े में खिंचाव महसूस होता है? दरअसल, कान के पीछे वाली नसों का जबड़े से गहरा कनेक्शन है। कानों में लगी ठंड अक्सर चेहरे की नसों में जकड़न पैदा कर देती है।

सर्दियों में क्यों होती है कानों में ज्यादा परेशानी?

सर्दी के मौसम में कान में होने वाला इन्फेक्शन और 'टिनिटस' (कानों में सीटी बजने जैसा महसूस होना) बहुत आम हो जाता है। इसका कारण है कम तापमान की वजह से शरीर का सुस्त खून का दौरा। कानों में रक्त का प्रवाह कम होने से उनकी खुद की गर्माहट कम हो जाती है, जिससे उनमें सूजन आने की संभावना बढ़ जाती है।

बचाव के कुछ 'देसी' और आसान तरीके:

  • स्कार्फ या टोपी का इस्तेमाल: ये फैशन के लिए नहीं, बल्कि जरूरत है। हमेशा कानों को कवर करके बाहर निकलें।
  • हल्का गर्म तेल: अगर कान में दर्द महसूस हो, तो दादी-नानी का नुस्खा 'हल्का गर्म सरसों का तेल' काफी काम आता है, लेकिन ध्यान रहे कान में घाव न हो।
  • नहाने के बाद रखें सावधानी: अक्सर लोग गीले कानों के साथ बाहर निकल जाते हैं, जो सर्दी पकड़ने का सबसे बड़ा कारण है। बालों और कानों के बाहरी हिस्से को अच्छे से सुखाएं।
  • तिल के लड्डू या गोंद: सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन ऐसी तासीर वाली चीजें शरीर को भीतर से गर्म रखती हैं, जिससे कानों की नसें भी दुरुस्त रहती हैं।