Bollywood : क्यों नहीं रहा अमिताभ का जातीय सरनेम? जानें हरिवंश राय बच्चन के क्रांतिकारी कदम की पूरी कहानी
News India Live, Digital Desk: शायद ही कोई जानता हो कि बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का असली नाम 'इन्कलाब' होने वाला था. हाल ही में अमिताभ के भाई अजीतभ बच्चन ने इस बड़े रहस्य से पर्दा उठाया है. उन्होंने बताया कि अमिताभ के पिता, महान कवि हरिवंश राय बच्चन ने अपने नाम के आगे से अपनी जाति वाला उपनाम 'श्रीवास्तव' हटाकर 'बच्चन' नाम क्यों अपनाया था. यह फैसला न सिर्फ हरिवंश राय बच्चन के विचारों की गहराई दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि उनके परिवार ने कैसे समाज में जातिगत भेदभाव को खारिज किया.
अमिताभ बच्चन के पिता, हरिवंश राय बच्चन, जाति-पाति के घोर विरोधी थे. अजीतभ ने बताया कि हरिवंश राय के स्कूल के दस्तावेज़ों में कहीं भी 'बच्चन' उपनाम का ज़िक्र नहीं था, और यह नाम उन्हें बाद में उनके कवि दोस्त सुमित्रानंदन पंत ने दिया था. जब हरिवंश राय ऑक्सफोर्ड में पीएचडी कर रहे थे, तो वहां एक अधिकारी ने पूछा कि उनका उपनाम क्या है. हरिवंश राय बच्चन ने सोचा कि अगर वह अपनी जाति बताते हैं तो वह फिर से उसी सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे जिससे वह दूरी बनाना चाहते थे. इसलिए उन्होंने गर्व से कहा, "बच्चन!" यहीं से उनका और उनके परिवार का नया उपनाम 'बच्चन' पड़ा.
सबसे पहले, उनका नाम 'इन्कलाब' रखा जाने वाला था. लेकिन यह बात भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान की थी. जब भारत आज़ाद हुआ तो हरिवंश राय ने बेटे का नाम अमिताभ रख दिया. दरअसल, उनके घर आए मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंत ने उनसे कहा था, "जब उनका नाम हरिवंश राय था तो वो ऐसे ही किसी कविता पाठ में मंच से वापस आ जाते थे." पंत ने यह भी बताया कि उस समय हरिवंश राय ने उन्हें अपनी कविताएँ दिखाकर बताया कि उनका कोई उपनाम नहीं था और उन्होंने कविता लिखने की कला पर ध्यान दिया. पंत ही वो शख्स थे जिन्होंने कहा कि तुम अपना नाम 'बच्चन' रख लो, तबसे वह इसी नाम से जाने गए.
यह सिर्फ़ एक उपनाम बदलने की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसने अपने बच्चों के लिए बेहतर और भेदभाव रहित भविष्य की नींव रखी. अमिताभ बच्चन को मिला 'बच्चन' नाम केवल उनकी पहचान नहीं, बल्कि उनके परिवार के क्रांतिकारी विचारों और सामाजिक समानता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है.