बिहार के चुनावी महाभारत में किसकी होगी जीत? उपेंद्र कुशवाहा बोले- NDA पांडव, RJD कौरवसिर कलम कर देंग

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News India Live, Digital Desk : बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, नेताओं के बयानों में तल्खी और धार दोनों बढ़ती जा रही है. अब इस चुनावी रण में 'महाभारत' की भी एंट्री हो गई है. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के अध्यक्ष और एनडीए के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने एक बड़ा बयान देते हुए बिहार चुनाव की तुलना महाभारत के युद्ध से कर दी है. उन्होंने एनडीए को 'पांडव' और महागठबंधन, खासकर आरजेडी को 'कौरव' करार दिया है.

"हम पांडव हैं, पांच गांव नहीं, पांच सीटें भी नहीं देंगे"

उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बयान में कहा, “बिहार में यह चुनाव धर्मयुद्ध है. एक तरफ़ पांडवों की सेना है, जो एनडीए है और दूसरी तरफ़ कौरवों की सेना है, जो आरजेडी और उसका गठबंधन है. जैसे महाभारत में कौरवों ने पांडवों को पांच गांव तक देने से मना कर दिया था, उसी तरह बिहार की जनता इन कौरवों (आरजेडी) को पांच सीटें भी नहीं देगी.”

कुशवाहा ने ज़ोर देकर कहा कि इस चुनाव में जनता का पूरा समर्थन और आशीर्वाद एनडीए गठबंधन के साथ है और जीत पांडवों यानी एनडीए की ही होगी.

'सिर' वाले बयान से मचा बवाल

उपेंद्र कुशवाहा यहीं नहीं रुके. उन्होंने और भी ज़्यादा आक्रामक रुख अपनाते हुए आरजेडी पर निशाना साधा. जब उनसे पूछा गया कि महागठबंधन के नेता लगातार कह रहे हैं कि इस बार वे एनडीए का 'सिर' उठा कर पटक देंगे, तो इसके जवाब में कुशवाहा ने कहा:

"किसमें है दम जो हमारा सिर पटक देगा? किसी ने मां का दूध नहीं पिया है. उल्टा हम ही उनका सिर कलम कर देंगे."

कुशवाहा के इस 'सिर कलम' वाले बयान ने बिहार की सियासत को और गरमा दिया है. उनके इस बयान को सीधे तौर पर आरजेडी को दी गई एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.

क्यों आक्रामक हैं कुशवाहा?

उपेंद्र कुशवाहा कुछ समय पहले ही महागठबंधन छोड़कर एनडीए में वापस लौटे हैं. एनडीए में आने के बाद से ही वे लगातार तेजस्वी यादव और आरजेडी पर हमलावर हैं. उनका यह आक्रामक अंदाज़ दिखाता है कि वे एनडीए में अपनी जगह मज़बूत करना चाहते हैं और यह साबित करना चाहते हैं कि वे आरजेडी के ख़िलाफ़ एक मज़बूत आवाज़ हैं.

बहरहाल, नेताओं के इन बयानों से यह तो साफ़ है कि बिहार का चुनाव अब सिर्फ़ विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह व्यक्तिगत हमलों और ऐतिहासिक उपमाओं के दौर में प्रवेश कर चुका है. अब देखना यह है कि इस चुनावी 'महाभारत' में बिहार की जनता किसका राजतिलक करती है.