White vs Brown Rice: डायबिटीज के मरीजों के लिए कौन सा चावल है वरदान और कौन सा जहर चौंकाने वाले तथ्य

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News India Live, Digital Desk: भारत में चावल भोजन का एक अभिन्न हिस्सा है, लेकिन जब बात डायबिटीज (Diabetes) की आती है, तो सबसे पहले चावल पर ही कैंची चलती है। डायबिटीज के मरीजों को अक्सर सफेद चावल से दूर रहने की सलाह दी जाती है, वहीं ब्राउन राइस को एक 'सुपरफूड' की तरह प्रमोट किया जाता है। लेकिन क्या वाकई ब्राउन राइस हर मायने में सफेद चावल से बेहतर है? विशेषज्ञों की राय और पोषण संबंधी तथ्यों के आधार पर आइए समझते हैं कि आपके शुगर लेवल के लिए क्या सही है।

सफेद चावल (White Rice): स्वाद में हिट, सेहत पर भारी?

सफेद चावल को रिफाइनिंग प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिसमें इसकी बाहरी परत (ब्रान) और भ्रूण (जर्म) को हटा दिया जाता है।

हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI): सफेद चावल का GI स्कोर काफी ज्यादा (लगभग 70-73) होता है। इसका मतलब है कि इसे खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर लेवल तेजी से स्पाइक कर सकता है।

पोषक तत्वों की कमी: प्रोसेसिंग के दौरान इसमें मौजूद फाइबर, विटामिन और मिनरल्स काफी हद तक निकल जाते हैं, जिससे यह केवल 'खाली कैलोरी' बनकर रह जाता है।

ब्राउन राइस (Brown Rice): शुगर कंट्रोल करने का साथी

ब्राउन राइस एक 'होल ग्रेन' (साबुत अनाज) है, जिसकी केवल बाहरी भूसी हटाई जाती है।

फाइबर का खजाना: इसमें मौजूद फाइबर कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता।

लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स: इसका GI स्कोर (लगभग 50-55) मध्यम श्रेणी में आता है, जो इसे टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए एक सुरक्षित विकल्प बनाता है।

मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट: इसमें मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में होता है, जो इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को सुधारने में मदद करता है।

डायबिटीज में चावल खाने का 'स्मार्ट तरीका'

अगर आप चावल के शौकीन हैं और डायबिटीज के मरीज भी, तो आप इन टिप्स को अपनाकर खुद को सुरक्षित रख सकते हैं:

पोर्शन कंट्रोल: चाहे ब्राउन राइस हो या सफेद, मात्रा का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। एक बार में एक छोटी कटोरी से ज्यादा चावल न खाएं।

सब्जियों का साथ: चावल को हमेशा ढेर सारी फाइबर वाली सब्जियों, दाल या पनीर के साथ खाएं। इससे मील का ओवरऑल ग्लाइसेमिक लोड कम हो जाता है।

कुकिंग तकनीक: चावल को प्रेशर कुकर के बजाय पतीले में ज्यादा पानी के साथ पकाएं और अतिरिक्त मांड (स्टार्च) को निकाल दें।

ठंडा करके खाएं: शोध बताते हैं कि चावल को पकाकर ठंडा करने से उसमें 'रेसिस्टेंट स्टार्च' बढ़ जाता है, जो शुगर लेवल को कम प्रभावित करता है।