श्मशान से लौटते वक्त भूलकर भी न करें यह 1 गलती, आत्मा को नहीं मिलती शांति

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News India Live, Digital Desk : जीवन का सबसे बड़ा और अटल सत्य है मृत्यु। जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। जब कोई अपना इस दुनिया को छोड़कर चला जाता है, तो परिवार और प्रियजन उसे आखिरी विदाई देने श्मशान घाट तक जाते हैं। अंतिम संस्कार की क्रियाओं से जुड़े कई नियम और मान्यताएं हैं, जिनका पालन सदियों से किया जा रहा है। इन्हीं में से एक सबसे महत्वपूर्ण और कठोर नियम है - शमशान से लौटते समय पीछे मुड़कर न देखना। जीवन का सबसे बड़ा और अटल सत्य है मृत्यु। जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। जब कोई अपना इस दुनिया को छोड़कर चला जाता है, तो परिवार और प्रियजन उसे आखिरी विदाई देने श्मशान घाट तक जाते हैं। अंतिम संस्कार की क्रियाओं से जुड़े कई नियम और मान्यताएं हैं, जिनका पालन सदियों से किया जा रहा है। इन्हीं में से एक सबसे महत्वपूर्ण और कठोर नियम है - शमशान से लौटते समय पीछे मुड़कर न देखना।

अक्सर बड़े-बुजुर्ग हमें यह हिदायत देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों कहा जाता है? क्या यह सिर्फ एक अंधविश्वास है या इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपा है? हिन्दू धर्म के महापुराण, गरुड़ पुराण में इस नियम के पीछे के रहस्यों को विस्तार से बताया गया है।

चलिए, आज जानते हैं कि आखिर क्यों अंतिम संस्कार के बाद पीछे मुड़कर देखना इतना अशुभ माना जाता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार, इसके पीछे हैं 3 बड़े कारण:

1. मोह-माया का बंधन:
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसकी आत्मा तुरंत अपने परिवार और सांसारिक चीजों से मोह नहीं त्याग पाती। आत्मा कुछ समय तक अपने प्रियजनों के आस-पास ही भटकती रहती है। ऐसे में, जब परिवार के लोग श्मशान से लौटते वक्त पीछे मुड़कर देखते हैं, तो आत्मा इसे अपने प्रति मोह का इशारा समझती है।

यह मोह आत्मा को आगे की यात्रा करने से रोकता है और उसे कष्ट देता है। आपका एक बार मुड़कर देखना उस आत्मा को यह उम्मीद दे सकता है कि आप उसे वापस बुला रहे हैं। यह बंधन न तो आत्मा की शांति के लिए अच्छा है और न ही परिवार वालों के लिए। इसलिए, बिना पीछे मुड़े आगे बढ़ जाना यह दर्शाता है कि आप आत्मा को शांतिपूर्वक विदा कर रहे हैं।

2. बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जा का साया:
श्मशान घाट एक ऐसी जगह है, जहां लगातार दाह संस्कार होते रहते हैं। इस वजह से वहां सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह की ऊर्जाएं बहुत प्रबल होती हैं। माना जाता है कि वहां कई अतृप्त और भटकती हुई आत्माएं भी मौजूद रहती हैं जो मोक्ष की तलाश में होती हैं।

जब कोई व्यक्ति श्मशान से लौटते वक्त पीछे मुड़कर देखता है, तो वह मानसिक रूप से कमजोर क्षण में होता है। ऐसे में ये नकारात्मक शक्तियां और बुरी आत्माएं उस व्यक्ति की ओर आकर्षित हो सकती हैं और उसके साथ उसके घर तक आ सकती हैं। यह नकारात्मक ऊर्जा घर में बीमारी, लड़ाई-झगड़े और मानसिक अशांति का कारण बन सकती है।

3. मृत आत्मा का भ्रम और भटकाव:
यह भी माना जाता है कि जब शरीर जल जाता है, तो आत्मा एक नई अवस्था में होती है और उसे समझ नहीं आता कि उसे कहां जाना है। वह अपने परिवार के साथ ही वापस घर लौटना चाहती है।

जब आप बिना पीछे मुड़े सीधे घर की तरफ बढ़ते हैं, तो आत्मा को यह संदेश मिलता है कि अब सांसारिक बंधन खत्म हो चुका है और उसे अब आगे परलोक की यात्रा करनी है। लेकिन अगर आप पीछे मुड़कर देखते हैं, तो वह भ्रमित हो सकती है और आपके साथ घर की तरफ चल पड़ती है। ऐसा होने पर वह आत्मा घर और श्मशान के बीच में ही फंसकर रह जाती है, जिसे 'प्रेत बाधा' भी कहा जाता है।

इसलिए, आखिरी संस्कार के बाद पीछे मुड़कर न देखना सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह मृत आत्मा की शांति और अपने परिवार की सुरक्षा, दोनों के लिए बेहद जरूरी है। यह नियम हमें सिखाता है कि जीवन में आगे बढ़ना और जो चला गया है उसे शांति से विदा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।