जब आपकी लाडली दे रही हो बड़े होने की दहलीज़ पर दस्तक
बचपन की गलियों से निकलकर जब एक लड़की किशोरावस्था यानी टीनएज की दहलीज़ पर कदम रखती है, तो यह सिर्फ़ उसकी उम्र का ही बदलाव नहीं होता. यह एक ऐसा दौर होता है, जब उसके अंदर तूफ़ान की तरह हज़ारों मानसिक और शारीरिक बदलाव आ रहे होते हैं. इस वक़्त उसे सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है अपनी माँ की, एक दोस्त की तरह. ख़ास तौर पर जब बात पीरियड्स जैसे ज़रूरी और संवेदनशील विषय की हो.
आज भी हमारे समाज में कई घरों में इस विषय पर खुलकर बात करने में झिझक महसूस होती है। लेकिन यह एक सच्चाई है जिससे हर लड़की को गुज़रना पड़ता है, और उसे यह बात समझाने के लिए एक माँ से बेहतर और कौन हो सकता है? अगर आपकी बेटी भी 12-13 साल की हो रही है, तो यही सही समय है कि आप उसकी सबसे अच्छी दोस्त बनें और उसे ज़िंदगी के इस नए अध्याय के लिए तैयार करें।
कैसे करें अपनी बेटी से बात?
- बताएं कि यह डरने की नहीं, समझने की बात है:
सबसे पहले अपनी बेटी के मन से यह डर निकालें कि पीरियड्स कोई बीमारी या अजीब चीज़ है. उसे प्यार से समझाएं कि यह बड़े होने का एक सामान्य और बहुत ही नेचुरल प्रोसेस है. जैसे हम सांस लेते हैं, खाना खाते हैं, वैसे ही यह भी हर लड़की की ज़िंदगी का एक हिस्सा है. बताएं कि जब यह उसे शुरू होगा, तो इसका मतलब है कि उसका शरीर अब एक औरत बनने की दिशा में पहला कदम बढ़ा रहा है. - साफ़-सफ़ाई है सबसे ज़रूरी:
इस दौरान शरीर में कई बदलाव आते हैं, इसलिए अपनी बेटी को पर्सनल हाइजीन का महत्व समझाएं. उसे बताएं कि रोज़ाना नहाना, साफ़ अंडरगार्मेंट्स पहनना और पीरियड्स के दिनों में पैड या टैम्पोन का सही इस्तेमाल करना कितना ज़रूरी है. यह सिर्फ़ बाहर की सफ़ाई नहीं, बल्कि अंदरूनी इन्फेक्शन से बचने के लिए भी बहुत ज़रूरी है. - शरीर में हो रहे बदलावों को समझाएं:
पीरियड्स शुरू होने के साथ-साथ ब्रेस्ट में हल्का दर्द महसूस होना या बॉडी शेप में बदलाव आना भी স্বাভাবিক है. उसे इन बदलावों के बारे में बताएं ताकि वह घबराए नहीं. उसे यह भी समझाएं कि इन बदलावों के साथ कपड़ों का चुनाव कैसे करें, ख़ासकर सही तरह के इनरवियर पहनना क्यों ज़रूरी है. इसका मतलब उसे तन ढकने का पाठ पढ़ाना नहीं, बल्कि अपने शरीर के साथ सहज होना सिखाना है. - उसे इमोशनली सपोर्ट करें:
यह वो समय है जब मूड स्विंग्स, पेट में दर्द और चिड़चिड़ापन होना आम बात है. उसे बताएं कि ऐसा होना बिल्कुल नॉर्मल है और आप हर पल उसके साथ हैं. जब उसे दर्द हो, तो आप उसे गर्म पानी की थैली से सिकाई करने या अजवाइन का पानी पीने जैसे घरेलू नुस्खे बता सकती हैं. आपका प्यार और सहारा उसे इस तकलीफ़ से लड़ने की हिम्मत देगा. - सिर्फ़ अपनी नहीं, दूसरों की भी मदद करना सिखाएं:
अपनी बेटी को सिखाएं कि स्कूल में अगर उसकी किसी दोस्त को अचानक पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो वह उसका मज़ाक उड़ाने की बजाय उसकी मदद करे. उसे हमेशा अपने बैग में एक एक्स्ट्रा सैनिटरी नैपकिन रखने की सलाह दें. यह छोटी-सी बात उसे ज़िम्मेदार और संवेदनशील बनाएगी.
याद रखिए, आपकी बेटी इस नाज़ुक मोड़ पर किसी लेक्चरर को नहीं, बल्कि एक माँ, एक दोस्त को ढूंढ रही है, जो उसकी सुने, उसे समझे और उसे हिम्मत दे. आपकी एक प्यार भरी बातचीत उसे ज़िंदगी के इस बड़े बदलाव को हिम्मत और आत्मविश्वास के साथ अपनाने में मदद करेगी.