बिहार की बेटी को न्याय कब मिलेगा? रोहतास मामले में भावुक हुए तेज प्रताप यादव, पीएम मोदी और योगी को भेजी चिट्ठी
News India Live, Digital Desk : जब बात अपनी 'घर की बेटी' पर आती है, तो दलगत राजनीति और राज्यों की सीमाएं छोटी पड़ जाती हैं। बिहार के रोहतास की एक बेटी, जो आँखों में सपने लेकर बनारस गई थी, वहां उसके साथ जो कुछ भी हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। अब इस परिवार को न्याय दिलाने के लिए आरजेडी नेता तेज प्रताप यादव खुलकर सामने आ गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
रोहतास जिले की रहने वाली एक युवती की उत्तर प्रदेश के वाराणसी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिवार का आरोप है कि यह महज़ एक हादसा नहीं है और उन्हें वहां की स्थानीय पुलिस की तफ्तीश पर पूरा भरोसा नहीं है। जब इस बात की भनक तेज प्रताप यादव को लगी, तो उन्होंने चुप बैठना ठीक नहीं समझा।
सीधे पीएम और सीएम को लिखा पत्र
तेज प्रताप यादव ने अपनी संवेदना और नाराजगी व्यक्त करते हुए एक-दो नहीं, बल्कि सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आधिकारिक पत्र लिख डाला है।
तेज प्रताप का साफ़ कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच CBI (सीबीआई) को सौंप देनी चाहिए। उनका मानना है कि चूंकि मामला दो अलग-अलग राज्यों (बिहार और यूपी) के बीच का है और पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए एक केंद्रीय एजेंसी ही दूध का दूध और पानी का पानी कर सकती है।
इंसाफ की पुकार
तेज प्रताप ने अपनी चिट्ठी में इस बात पर जोर दिया है कि "हमें अपनी बहन के लिए सिर्फ सांत्वना नहीं, बल्कि इंसाफ चाहिए।" उन्होंने योगी सरकार से अपील की है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि किसी और बेटी के साथ ऐसा न हो।
राजनीति या जिम्मेदारी?
कुछ लोग इसे राजनीति से प्रेरित बता सकते हैं, लेकिन अगर किसी पीड़ित परिवार को सत्ता के बड़े गलियारों में आवाज़ उठाने वाला कोई मिल जाता है, तो उनके लिए न्याय की उम्मीद बढ़ जाती है। रोहतास में इस वक्त मातम के साथ-साथ आक्रोश भी है, और तेज प्रताप के इस कदम ने पीड़ित परिवार को यह भरोसा दिलाया है कि वे अकेले नहीं हैं।
आप क्या सोचते हैं?
क्या ऐसे गंभीर मामलों में शुरुआत से ही बड़ी जांच एजेंसियों को शामिल कर लेना चाहिए ताकि वक्त रहते सबूत सुरक्षित रहें? क्या उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारों को मिलकर इस पर ठोस कदम नहीं उठाने चाहिए?