जब जग्गू दादा हो गए थे कंगाल, तब पत्नी आयशा के एक 'मास्टरस्ट्रोक' ने 1 लाख को बना दिया 100 करोड़!
जब भी जैकी श्रॉफ (Jackie Shroff) का नाम आता है, तो आँखों के सामने 'बिंदास भिड़ू' वाली एक मज़ेदार छवि आ जाती है। और बेटे टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) का नाम लें, तो हवा में उड़ते हुए एक्शन सीन। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फ़ैमिली का असली 'मास्टरस्ट्रोक' किसी फ़िल्म में नहीं, बल्कि शेयर बाज़ार में खेला गया था? और इस खेल की असली खिलाड़ी थीं जैकी की पत्नी और टाइगर की माँ, आयशा श्रॉफ़ (Ayesha Shroff)।
यह कोई फ़िल्मी कहानी नहीं, बल्कि एक असली कहानी है कि कैसे सिर्फ़ 1 लाख रुपए के एक छोटे से निवेश ने 15 सालों में 100 करोड़ रुपए का पहाड़ खड़ा कर दिया!
वो दौर, जब बिक गया था घर और आ गई थी कंगाली
यह कहानी उस दौर की है, जब श्रॉफ़ फ़ैमिली एक बहुत बड़े आर्थिक संकट से गुज़र रही थी। साल 2003 में आयशा श्रॉफ़ ने 'बूम' नाम की एक फ़िल्म प्रोड्यूस की थी, जिसमें अमिताभ बच्चन और कटरीना कैफ़ जैसे सितारे थे। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बुरी तरह पिटी कि श्रॉफ़ फ़ैमिली को अपना घर तक बेचना पड़ गया था और वे आर्थिक रूप से टूट चुके थे।
डूबते को तिनके का नहीं, 'शेयर' का मिला सहारा
लेकिन आयशा ने हिम्मत नहीं हारी और फ़िल्मों से हटकर निवेश की दुनिया में एक छोटा सा, लेकिन बहुत समझदारी भरा क़दम रखा। उन्होंने पॉन्डी ऑक्साइड्स एंड केमिकल्स (Pondy Oxides and Chemicals) नाम की एक छोटी कंपनी के क़रीब 17,000 शेयर ख़रीदे। उस वक़्त एक शेयर की क़ीमत सिर्फ़ 6 रुपए के आसपास थी, जो उन्हें और भी कम में मिली होगी। यानी कुल मिलाकर क़रीब 1 लाख रुपए का निवेश।
इसके बाद आयशा ने वो किया, जो शेयर बाज़ार में सबसे मुश्किल काम माना जाता है - सब्र यानी इंतज़ार। उन्होंने इन शेयरों को बेचा नहीं, बल्कि क़रीब 15 सालों तक अपने पास रखे रहीं।
और फिर हुआ एक 'चमत्कार'!
उनके इसी सब्र ने एक ऐसा कमाल कर दिखाया, जो किसी फ़िल्मी जैकपॉट से कम नहीं था। इन 15 सालों में 'पॉन्डी ऑक्साइड्स एंड केमिकल्स' कंपनी ने ज़बरदस्त तरक्की की और उसके शेयर की क़ीमत आसमान छूने लगी। आज इस कंपनी के एक शेयर की क़ीमत हज़ारों में पहुँच चुकी है, और उनके उन 17,000 शेयरों की कुल क़ीमत 100 करोड़ रुपए से भी ज़्यादा हो गई है।
यह कहानी सिर्फ़ श्रॉफ़ फ़ैमिली के पैसे बनाने की नहीं है, बल्कि यह बुरे वक़्त में हिम्मत न हारने और सही जगह पर सब्र के साथ किए गए एक छोटे से निवेश की ताक़त की कहानी है। यह हर उस आम निवेशक के लिए एक बहुत बड़ा सबक है जो रातों-रात अमीर बनना चाहता है। आयशा श्रॉफ़ ने साबित कर दिया कि असली 'मास्टरस्ट्रोक' के लिए शोर नहीं, बल्कि शांति और सब्र की ज़रूरत होती है।