Vat Savitri Vrat 2026: कब है वट सावित्री व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और अखंड सौभाग्य के लिए पूजन विधि
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला 'वट सावित्री व्रत' विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। वर्ष 2026 में वट सावित्री व्रत की तिथि को लेकर कुछ लोग असमंजस में हैं, आइए जानते हैं इसकी सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण विधि।
वट सावित्री व्रत 2026: कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
अमावस्या तिथि की शुरुआत: 15 मई 2026, शुक्रवार को सुबह 08:35 बजे से।
अमावस्या तिथि की समाप्ति: 16 मई 2026, शनिवार को सुबह 06:12 बजे तक।
उदया तिथि के अनुसार: वट सावित्री व्रत 15 मई 2026 (शुक्रवार) को ही रखा जाएगा। इसी दिन महिलाएं वट वृक्ष (बरगद) की पूजा करेंगी।
बरगद के पेड़ की पूजा का महत्व
शास्त्रों में वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ को 'देव वृक्ष' माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ की जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है। साथ ही, सावित्री ने इसी पेड़ के नीचे अपने मृत पति को दोबारा जीवित होते देखा था। इसलिए इस पेड़ की पूजा करने से वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पति को लंबी आयु प्राप्त होती है।
पूजन विधि: कैसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा?
स्नान और संकल्प: व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के सुंदर वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें।
सामग्री तैयार करें: बांस की टोकरी में सात तरह के अनाज, सावित्री-सत्यवान की मूर्ति, कलावा (सूत), धूप, दीप, फल और भीगे हुए चने रखें।
वट वृक्ष की पूजा: बरगद के पेड़ के पास जाकर उसे जल अर्पित करें। इसके बाद कुमकुम और अक्षत से तिलक करें।
कच्चे सूत का फेरा: वट वृक्ष के चारों ओर कच्चे सूत या कलावा को लपेटते हुए 7 या 108 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय मन ही मन अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें।
कथा श्रवण: पूजा के बाद सावित्री और सत्यवान की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। अंत में चने और फल का प्रसाद बांटें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
शुभ मुहूर्त और योग
15 मई 2026 को पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सुबह का रहेगा। इस दिन 'शोभन योग' बन रहा है, जो पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना विशेष फल प्रदान करेगा।