Bihar: जेडीयू की नई टीम में सोशल इंजीनियरिंग का मास्टरस्ट्रोक, नीतीश ने पिछड़ों और अति पिछड़ों को दी 46% हिस्सेदारी
News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में 'जातीय समीकरण' और 'सोशल इंजीनियरिंग' के माहिर खिलाड़ी माने जाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) की नई टीम में एक बड़ा दांव खेला है। 2026 के राजनीतिक बदलावों और आगामी चुनावों को देखते हुए जेडीयू की नई राष्ट्रीय और प्रादेशिक टीम का गठन किया गया है। इस नई टीम में पिछड़ी जातियों (OBC) और अति पिछड़ी जातियों (EBC) को जबरदस्त प्रतिनिधित्व दिया गया है। पार्टी के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, नई कमेटी में करीब 46 प्रतिशत सदस्य इसी वर्ग से आते हैं।
जातीय समीकरणों पर नीतीश का फोकस
नीतीश कुमार ने अपनी नई टीम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि जेडीयू आज भी 'शोषितों' और 'वंचितों' की असली आवाज है। नई राष्ट्रीय कमेटी में न केवल जातियों का संतुलन साधा गया है, बल्कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी महत्व दिया गया है। 46 प्रतिशत ओबीसी और ईबीसी की भागीदारी के साथ, पार्टी ने अपने मूल वोट बैंक (Luv-Kush and EBC) को एकजुट रखने की कोशिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार की राजनीति में जाति जनगणना के बाद यह कदम जेडीयू को फिर से मजबूती प्रदान करेगा।
दलित और अल्पसंख्यकों को भी मिली जगह
पिछड़ों और अति पिछड़ों के अलावा, नई टीम में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं को भी पर्याप्त स्थान दिया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पूरी टीम के गठन में इस बात का खास ख्याल रखा गया है कि समाज के किसी भी वर्ग में नाराजगी न रहे। सवर्णों को भी महत्वपूर्ण सांगठनिक पदों पर बरकरार रखा गया है, ताकि एक 'समावेशी' छवि पेश की जा सके।
अनुभव और युवा जोश का संगम
जेडीयू की इस नई टीम में कई पुराने दिग्गजों के साथ-साथ युवा चेहरों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने उन नेताओं को तरजीह दी है जो जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं और जाति आधारित गणना के बाद बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी के एजेंडे को जनता तक ले जा सकें। नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया है कि संगठन का विस्तार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नई टीम सीधे जनता के बीच जाकर काम करेगी।
विरोधी खेमों में हलचल
नीतीश कुमार के इस '46 प्रतिशत फॉर्मूले' ने विपक्षी दलों, विशेषकर आरजेडी और बीजेपी के भीतर हलचल पैदा कर दी है। चूंकि बिहार की सत्ता में हाल ही में बड़े बदलाव हुए हैं और नीतीश कुमार खुद राज्यसभा के जरिए नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं, ऐसे में जेडीयू का यह सांगठनिक बदलाव आगामी रणनीतियों का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना यह है कि यह 'सोशल इंजीनियरिंग' भविष्य के चुनावी दंगलों में पार्टी के लिए कितनी कारगर साबित होती है।