महादेव की भक्ति का महासंयोग साल 2026 में कब है महाशिवरात्रि? जानें सही मुहूर्त और पूजा के नियम

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News India Live, Digital Desk : आज 31 दिसंबर 2025 है, यानी आज का दिन बीतते ही हम एक नई ऊर्जा और नई उम्मीदों के साथ साल 2026 में प्रवेश कर जाएंगे। नए साल का स्वागत करने के साथ-साथ शिव भक्त अब बेसब्री से उस रात का इंतजार कर रहे हैं, जो महादेव की कृपा बरसने वाली रात मानी जाती है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं महाशिवरात्रि की।

फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली यह रात, सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और मिलन का प्रतीक है। आइए जानते हैं कि 2026 में यह महासंयोग कब बन रहा है।

2026 में कब है महाशिवरात्रि? (तारीख और समय)

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, साल 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी और 16 फरवरी के बीच पड़ने की संभावना है। चूँकि हिंदू पंचांग में तिथि रात को बदलती है और महाशिवरात्रि में रात की पूजा यानी 'निशिता काल' का सबसे बड़ा महत्व होता है, इसलिए अधिकांश विद्वान 16 फरवरी 2026 (सोमवार) को महाशिवरात्रि मनाने की सलाह दे रहे हैं।

सबसे अच्छी बात यह है कि इस साल महाशिवरात्रि सोमवार के दिन पड़ रही है, जिसे 'महादेव का अपना दिन' माना जाता है। ऐसे में इस बार का पर्व और भी ज्यादा मंगलकारी होने वाला है।

निशिता काल: वह जादुई घड़ी जब जाग उठती है अध्यात्मिकता

शास्त्रों के अनुसार, शिवरात्रि का असली फल आधी रात की पूजा से मिलता है। इस विशेष समय को 'निशिता काल' कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इसी समय पर शिवलिंग का प्राकट्य हुआ था। 2026 में 15 फरवरी की मध्यरात्रि के बाद और 16 फरवरी की अलसुबह के बीच इस समय का लाभ लिया जा सकता है।

व्रत के वो नियम जो हर भक्त को पता होने चाहिए

महाशिवरात्रि का व्रत केवल भूखा रहने का नाम नहीं है, बल्कि अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण का भी संकल्प है।

  • जलाभिषेक: तांबे के लोटे से गंगाजल और दूध का अर्पण करें।
  • बिल्वपत्र: ध्यान रखें कि पत्तियां कहीं से फटी न हों। शिवलिंग पर उल्टा (स्मूद साइड नीचे की ओर) करके बेलपत्र चढ़ाना चाहिए।
  • जागरण: अगर संभव हो, तो रात में चारों पहर की पूजा करें या शिव पुराण का पाठ सुनें।

भूलकर भी न करें ये छोटी गलतियाँ

अक्सर अनजाने में भक्त कुछ ऐसी चीजें कर जाते हैं जो शास्त्रों में मना हैं:

  1. हल्दी का प्रयोग: भगवान शिव पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती क्योंकि उन्हें वैरागी माना जाता है।
  2. सिंदूर या कुमकुम: माता पार्वती पर इसे अर्पित करें, लेकिन शिवलिंग पर सफेद चंदन या भस्म ही लगानी चाहिए।
  3. शंख का इस्तेमाल: शिव पूजा में शंख वर्जित माना जाता है।
  4. तुलसी: शिव को तुलसी दल नहीं चढ़ाया जाता (सिर्फ भगवान विष्णु और उनके अवतारों को ही तुलसी प्रिय है)।

अनोखा अहसास और नई शुरुआत

साल के अंत में जब हम आने वाले त्योहारों की लिस्ट बनाते हैं, तो महाशिवरात्रि मन को एक विशेष शांति देती है। शिव का मतलब ही 'कल्याण' है। चाहे आप अपने करियर को लेकर परेशान हों या जीवन के तनावों से, 16 फरवरी 2026 की यह रात महादेव के सामने बैठकर मन की बात कहने का सबसे बड़ा मौका होगी।

तो बस, अपनी आस्था की ज्योति जलाएं और अभी से उस अलौकिक अनुभव की तैयारी शुरू कर दें। उम्मीद है कि आने वाले साल की महाशिवरात्रि आप सभी के जीवन से अंधकार दूर कर खुशियों का प्रकाश भर देगी।