चाय ज़हर कब बन जाती है? अगर आप भी करते हैं ये गलतियाँ तो आज ही बदलें

Post

भारत में चाय सिर्फ एक पीने की चीज़ नहीं, बल्कि एक एहसास है। सुबह की पहली किरण हो या घर आए मेहमान, चाय के बिना कुछ पूरा नहीं होता। यह हमारी रोज़ की ज़िंदगी का एक ऐसा हिस्सा है जिसे हम छोड़ नहीं सकते। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी ये आदत चुपके-चुपके आपकी सेहत को नुकसान पहुँचा सकती है?

कई स्टडीज़ और हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज़रूरत से ज़्यादा चाय पीना शरीर के लिए ठीक नहीं है। चाय में मौजूद कैफीन और टैनिन आपको कुछ देर के लिए तो ताज़गी देते हैं, लेकिन लंबे समय तक इसका ज़्यादा सेवन पेट से लेकर दिल तक की परेशानियाँ खड़ी कर सकता है।

आइए, आज इसी बारे में बात करते हैं कि चाय पीने की आदत कब और कैसे आपके लिए खतरनाक बन जाती है और इससे कौन-सी बीमारियाँ हो सकती हैं। यह जानना उन लोगों के लिए बेहद ज़रूरी है, जिनकी दिन की शुरुआत और अंत चाय के कई कप से होता है।

ज़्यादा चाय पीने से कौन-सी बीमारियाँ होती हैं?

हद से ज़्यादा चाय पीने से एसिडिटी, नींद न आना और शरीर में आयरन की कमी जैसी आम समस्याएँ होने लगती हैं। जब हम बार-बार चाय पीते हैं, तो इसका कैफीन हमारे दिमाग को ज़रूरत से ज़्यादा एक्टिव कर देता है, जिससे घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगती है। खासकर, खाली पेट चाय पीना तो ज़हर पीने जैसा है।

जब आप सुबह उठते ही खाली पेट चाय पीते हैं, तो यह सीधे पेट की अंदरूनी दीवारों को नुकसान पहुँचाती है, जिससे अल्सर तक का खतरा बन सकता है। इसके अलावा, चाय में मौजूद टैनिन नाम का तत्व शरीर को खाने से मिलने वाले पोषक तत्वों, खासकर आयरन को सोखने से रोकता है। नतीजा यह होता है कि आप धीरे-धीरे एनीमिया यानी खून की कमी के शिकार हो जाते हैं।

पेट पर होता है सबसे पहला असर

ज़्यादा चाय का सबसे पहला और बुरा असर हमारे पेट पर ही पड़ता है। चाय में मौजूद टैनिन पाचन के प्रोसेस को धीमा कर देता है, जिससे पेट भारी लगना, गैस बनना और कब्ज़ जैसी शिकायतें आम हो जाती हैं।

जो लोग सुबह बिस्तर पर ही चाय (बेड टी) पीने के शौकीन हैं, उनके पेट में एसिड का लेवल तेज़ी से बढ़ जाता है। यही चीज़ आगे चलकर सीने में जलन और एसिडिटी का कारण बनती है। अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो आँतों में सूजन आने का खतरा भी रहता है।

नींद और मानसिक सेहत पर असर

चाय में मौजूद कैफीन आपके दिमाग को जगाने का काम करता है। अगर आप शाम को या सोने से ठीक पहले चाय पीते हैं, तो यह आपकी नींद के पैटर्न को बिगाड़ सकता है। आपको शायद पता न हो, लेकिन अच्छी नींद न आने से शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन (कोर्टिसोल) बढ़ने लगता है।

इसी वजह से आपको दिन भर थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन महसूस होता है। ज़्यादा चाय पीने वालों में चिंता (Anxiety) और बेचैनी की समस्याएँ भी अक्सर देखी जाती हैं।

कमज़ोर होती हड्डियाँ और जोड़ों का दर्द

यह बात बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन ज़्यादा चाय आपकी हड्डियों को अंदर से खोखला कर सकती है। चाय पीने से शरीर कैल्शियम को ठीक से सोख नहीं पाता। साथ ही, चाय पीने से पेशाब भी ज़्यादा आता है, जिससे शरीर में मौजूद ज़रूरी कैल्शियम बाहर निकल जाता है।

जब हड्डियों में कैल्शियम की कमी होती है, तो कम उम्र में ही जोड़ों में दर्द और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपको पहले से ही हड्डियों से जुड़ी कोई समस्या है, तो चाय आपकी तकलीफ़ बढ़ा सकती है।

आयरन की कमी और एनीमिया का खतरा

चाय में मौजूद कुछ तत्व (पॉलीफेनोल्स और टैनिन) हमारे खाने में मौजूद आयरन को शरीर में सोखने से रोकते हैं। भारत में, खासकर महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) का एक बड़ा कारण खाने के फौरन बाद चाय पीने की आदत भी है।

शरीर में आयरन कम होने से हीमोग्लोबिन का लेवल गिर जाता है, जिससे आप हर वक्त कमज़ोर, थका हुआ महसूस करते हैं, चक्कर आते हैं और साँस भी फूलने लगती है। डॉक्टर हमेशा सलाह देते हैं कि खाना खाने के कम से कम एक घंटे बाद तक चाय न पिएँ।

ब्लड प्रेशर और दिल के लिए खतरा

ज़्यादा चाय पीने से आपका ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है। कैफीन दिल की धड़कन को भी तेज़ कर देता है, जिससे दिल पर बेवजह का दबाव पड़ता है। जिन लोगों को हाई बीपी की समस्या पहले से है, अगर वे दिन में 4-5 कप चाय पीते हैं, तो यह हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकता है।

चाय की लत और उसके साइड इफेक्ट

चाय में मौजूद कैफीन एक तरह से नशे की तरह काम करता है। धीरे-धीरे आपको इसकी लत लग जाती है। अगर आपको समय पर चाय न मिले, तो तेज़ सिरदर्द, सुस्ती और चिड़चिड़ापन होने लगता है। यह लत शरीर के मेटाबॉलिज़्म को भी खराब कर देती है।

कई बार लोग भूख लगने पर भी चाय पी लेते हैं, जिससे उनकी भूख मर जाती है। ऐसे में शरीर को ज़रूरी पोषण नहीं मिल पाता और वज़न गिरने लगता है या कुपोषण से जुड़ी दूसरी बीमारियाँ घेर लेती हैं।

बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए ज़्यादा खतरनाक

बच्चों के बढ़ते शरीर के लिए कैफीन बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। यह उनकी भूख कम करता है और पढ़ाई में ध्यान लगाने की क्षमता पर भी असर डालता है। वहीं, गर्भवती महिलाओं के लिए ज़्यादा चाय गर्भपात का खतरा बढ़ा सकती है या होने वाले बच्चे का वज़न कम कर सकती है। गर्भावस्था के दौरान यह आयरन और फोलिक एसिड जैसे ज़रूरी पोषक तत्वों को शरीर में सोखने से भी रोकती है।

तो क्या करें? चाय कैसे पिएँ?

अगर आप चाय के शौकीन हैं तो इसे एकदम से छोड़ना मुश्किल है, लेकिन कुछ आसान तरीके अपनाकर आप इसके नुकसान से बच सकते हैं।

  • हमेशा चाय पीने से पहले एक गिलास पानी पिएँ, इससे पेट में एसिड नहीं बनेगा।
  • कोशिश करें कि दिन में 2 कप से ज़्यादा चाय न पिएँ।
  • अपनी चाय में दूध और चीनी की मात्रा कम रखें।
  • हर्बल टी या ग्रीन टी बेहतर विकल्प हो सकते हैं, लेकिन उन्हें भी सीमित मात्रा में ही पिएँ।