WhatsApp vs Telegram 2026 : सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बीच जुकरबर्ग की पुरानी चैट लीक पावेल ड्यूरोव का तंज 400 करोड़ यूजर्स को बनाया जा रहा मूर्ख

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News India Live, Digital Desk: भारत में व्हाट्सएप (WhatsApp) की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर विवाद एक बार फिर चरम पर है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मेटा और व्हाट्सएप को दी गई "देश छोड़ने" की चेतावनी के तुरंत बाद, टेलीग्राम के संस्थापक पावेल ड्यूरोव (Pavel Durov) ने मार्क जुकरबर्ग की एक 20 साल पुरानी चैट शेयर कर इंटरनेट पर सनसनी फैला दी है। इस खुलासे ने व्हाट्सएप के 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "चोरी का सभ्य तरीका"

3 फरवरी 2026 को एक सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट की बेंच (CJI सूर्या कांत की अध्यक्षता में) ने व्हाट्सएप की 'Take it or Leave it' (मानो या जाओ) वाली प्राइवेसी पॉलिसी पर कड़ा ऐतराज जताया।

अदालत ने कहा: "आप डेटा शेयरिंग के नाम पर देश के नागरिकों की निजता के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। यह एक तरह से निजी जानकारी की चोरी करने का सभ्य तरीका है।"

अल्टीमेटम: कोर्ट ने साफ कर दिया कि यदि मेटा भारतीय संविधान और नागरिकों की निजता का सम्मान नहीं कर सकती, तो वह भारत से अपना कारोबार समेट सकती है।

पावेल ड्यूरोव का धमाका: जुकरबर्ग की 2004 वाली चैट वायरल

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बीच, टेलीग्राम सीईओ पावेल ड्यूरोव ने एक्स (X) पर मार्क जुकरबर्ग की कॉलेज के दिनों की एक चैट का स्क्रीनशॉट साझा किया।

चैट का सार: इस पुरानी चैट में जुकरबर्ग कथित तौर पर उन लोगों का मजाक उड़ा रहे थे जिन्होंने उन पर भरोसा करके अपनी निजी जानकारी (ईमेल, फोटो आदि) साझा की थी।

ड्यूरोव का तंज: ड्यूरोव ने लिखा— "2004 से अब तक केवल पैमाना (Scale) बदला है। आज व्हाट्सएप का मालिक 4 हजार लोगों पर नहीं, बल्कि उन 400 करोड़ लोगों पर हंस रहा है जो उसके एन्क्रिप्शन के दावों पर भरोसा करते हैं।"

क्या खतरे में है 400 करोड़ यूजर्स का डेटा?

पावेल ड्यूरोव और एलन मस्क जैसे टेक दिग्गजों का आरोप है कि व्हाट्सएप पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।

मेटाडेटा ट्रैकिंग: भले ही व्हाट्सएप संदेश न पढ़ सके, लेकिन वह यह ट्रैक करता है कि आप किससे, कब और कितनी देर बात कर रहे हैं।

बैकअप सुरक्षा: क्लाउड बैकअप (Google Drive/iCloud) पर स्टोर डेटा अक्सर एन्क्रिप्टेड नहीं होता, जिससे सुरक्षा एजेंसियां या हैकर्स इसे एक्सेस कर सकते हैं।

कमर्शियल इस्तेमाल: सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी गई कि भारतीय यूजर्स का डेटा व्यावसायिक लाभ के लिए 'बेचा' और 'रेंट' पर दिया जा रहा है।

मेटा का बचाव: "सारे आरोप निराधार"

इन आरोपों के बीच मेटा के प्रवक्ता ने कहा है कि व्हाट्सएप का एन्क्रिप्शन सिस्टम विश्व स्तरीय है और कंपनी किसी भी यूजर के निजी संदेश नहीं देख सकती। उन्होंने कानूनी मुकदमों को 'तुच्छ' (Frivolous) करार दिया है।