जयपुर की सड़कों पर ये कैसा पागलपन? जब रफ़्तार और नशे ने उजाड़ दीं कई ज़िंदगियां
News India Live, Digital Desk : कहते हैं कि 'रफ़्तार' रोमांचित तो करती है, लेकिन वही रफ़्तार जब नियंत्रण खो दे, तो वह 'यमराज' बन जाती है। राजस्थान की राजधानी जयपुर, जो अपनी शांति और सुंदरता के लिए जानी जाती है, वहां हाल ही में एक ऐसी वारदात हुई जिसने हर किसी को हिलाकर रख दिया। मामला सादा सड़क हादसा नहीं था, यह शराब के नशे और अंधाधुंध कार रेसिंग (Car Racing) का वो मेल था जिसने गुलाबी शहर की सड़कों को लहूलुहान कर दिया।
क्या हुआ उस खौफनाक रात?
जब शहर चैन की नींद सो रहा था, तब जयपुर के कुछ व्यस्त चौराहों पर रफ़्तार का 'खूनी खेल' चल रहा था। चश्मदीदों की मानें तो गाड़ियाँ इतनी तेज़ थीं कि हवा से बात कर रही थीं। दो-तीन लग्जरी कारों के बीच आपसी रेस लग रही थी और उस पर तुर्रा ये कि ड्राइवर शराब के नशे में पूरी तरह धुत्त थे। अचानक एक ज़ोरदार धमाका हुआ—जो मुसाफिर अपने घरों को लौट रहे थे, उनकी गाड़ियाँ एक झटके में खिलौनों की तरह पिचक गईं।
चीख-पुकार और बिखरा हुआ सामान
हादसे के बाद का मंज़र इतना भयानक था कि देखने वालों के पसीने छूट गए। सडकों पर बिखरा कांच, गाड़ियों का मुड़ा हुआ लोहा और चारों तरफ़ इंसानी कराहें। हैरानी की बात तो ये है कि नशे में धुत उन रईसजादों को अंदाज़ा तक नहीं था कि उन्होंने कितनी बड़ी तबाही मचा दी है। जयपुर पुलिस के लिए भी यह एक चुनौतीपूर्ण रात थी। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन अफसोस, रफ़्तार की इस जंग में कुछ मासूमों ने अपनी आखिरी सांसें वहीं सड़क पर ले ली थीं।
सिर्फ़ पुलिस का डर काफ़ी नहीं है!
अक्सर ऐसे मामलों के बाद हम पुलिस और कानून को कोसने लगते हैं। बेशक, नाइट पेट्रोलिंग और चेक-पोस्ट सख्त होनी चाहिए, लेकिन असली सवाल 'हमारी' अपनी नैतिकता पर है। जयपुर जैसे शहर में, जहाँ अब पब-पार्टी कल्चर बढ़ रहा है, लोग अक्सर भूल जाते हैं कि उनकी ज़रा सी लापरवाही किसी के घर का दीया बुझा सकती है। वह रफ़्तार जो सिर्फ़ एड्रेनालाईन (Adrenaline) के लिए थी, आज पुलिस की फाइलों में एक दर्दनाक हादसा बनकर दर्ज़ हो चुकी है।
हम क्या कर सकते हैं?
प्रशासन अब भले ही सख्त कदम उठाए, लेकिन ज़िम्मेदारी हमारी भी है। अपने आसपास रेसिंग कल्चर को बढ़ावा न दें और अगर आप नशे में हैं, तो चाभी किसी और को थमा दें। याद रखिए, आपके घर पर भी कोई आपका इंतज़ार कर रहा है और सामने वाली गाड़ी में भी कोई अपना ही है।
आज पूरा जयपुर उन घायलों के लिए दुआ कर रहा है, जो अस्पताल के बेड पर ज़िन्दगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। काश, उस रात उन गाड़ियों की रफ़्तार पर समय रहते लगाम लग गई होती।