Clement Attlee Announcement : 20 फरवरी 1947 वह दिन जब ब्रिटेन ने मानी हार पीएम एटली ने किया था भारत को आजाद करने का ऐलान

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News India Live, Digital Desk: दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की कमजोर होती आर्थिक स्थिति और भारत में बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने फैसला किया कि अब भारत पर शासन करना उनके बस में नहीं है। एटली ने घोषणा की थी कि अंग्रेज 30 जून 1948 तक सत्ता भारतीयों को सौंप देंगे।

एटली की घोषणा की 4 बड़ी बातें (Key Highlights)

डेडलाइन (The Deadline): एटली ने स्पष्ट किया कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 से पहले भारत छोड़ देगी। यह पहली बार था जब अंग्रेजों ने अपनी वापसी की एक निश्चित तारीख दी थी।

लॉर्ड माउंटबेटन की नियुक्ति: इसी दिन यह भी घोषणा की गई कि लॉर्ड वावेल की जगह लॉर्ड माउंटबेटन को भारत का नया वायसराय बनाया जाएगा। उन्हें सत्ता हस्तांतरण (Transfer of Power) की प्रक्रिया को पूरा करने की विशेष जिम्मेदारी दी गई थी।

सत्ता किसे सौंपी जाएगी?: घोषणा में कहा गया था कि यदि भारतीय दल (कांग्रेस और मुस्लिम लीग) एक संविधान पर सहमत नहीं होते हैं, तो ब्रिटिश सरकार यह तय करेगी कि सत्ता किसे सौंपी जाए—चाहे वह केंद्र सरकार हो या मौजूदा प्रांतीय सरकारें।

रियासतों का भविष्य: यह भी साफ किया गया कि ब्रिटिश सर्वोच्चता (Paramountcy) समाप्त हो जाएगी, लेकिन यह रियासतों को खुद-ब-खुद किसी को नहीं सौंपी जाएगी।

तय तारीख से पहले क्यों मिली आजादी?

हालांकि एटली ने जून 1948 की तारीख दी थी, लेकिन भारत 15 अगस्त 1947 को ही आजाद हो गया। इसके पीछे मुख्य कारण थे:

सांप्रदायिक दंगे: देशभर में हिंदू-मुस्लिम दंगों ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया था।

माउंटबेटन की जल्दबाजी: माउंटबेटन का मानना था कि जितनी देरी होगी, स्थिति उतनी ही नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। इसलिए उन्होंने विभाजन और आजादी की प्रक्रिया को 10 महीने पहले ही अंजाम दे दिया।

विन्सटन चर्चिल का विरोध

दिलचस्प बात यह है कि एटली के इस फैसले का पूर्व प्रधानमंत्री विन्सटन चर्चिल ने कड़ा विरोध किया था। चर्चिल भारत को आजाद करने के खिलाफ थे, लेकिन एटली की लेबर पार्टी (Labour Party) ने भारत की आजादी को अपनी प्राथमिकता बनाया था।

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