शाहिद और ईशान के रिश्तों का असली सच, एक माँ के लिए क्या है इन दोनों में सबसे बड़ा अंतर?

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News India Live, Digital Desk : उम्मीद है आपका नया साल 2026 शानदार गुज़र रहा होगा। अक्सर जब हम फिल्मी दुनिया के चकाचौंध को देखते हैं, तो हमें लगता है कि वहाँ सब कुछ परफेक्ट है। लेकिन जब एक माँ अपने बच्चों के बारे में बात करती है, तो वही साधारण और मानवीय जज़्बात बाहर आते हैं जो किसी भी घर की कहानी हो सकते हैं।

शाहिद कपूर और ईशान खट्टर को हम अक्सर पर्दे पर देखते हैं। जहाँ शाहिद ने सालों से अपनी एक्टिंग से सबको चौंकाया है, वहीं ईशान भी अब अपना लोहा मनवा चुके हैं। लेकिन उनकी माँ, अनुभवी एक्ट्रेस नीलिमा अज़ीम (Neelima Azeem) की मानें, तो ये दोनों भाई ऊपर से जैसे दिखते हैं, अंदर से उतने ही अलग हैं।

शाहिद: जो महसूस बहुत गहरा करते हैं
नीलिमा का कहना है कि शाहिद कपूर स्वभाव से थोड़े 'सेंसिटिव' (Sensitive) यानी संवेदनशील हैं। हम भले ही उन्हें 'कबीर सिंह' जैसी एंग्री यंग मैन वाली भूमिकाओं में देखते हैं, लेकिन निजी ज़िंदगी में वे चीज़ों को बहुत गहराई से महसूस करते हैं। एक बड़े भाई के तौर पर उन्होंने हमेशा ज़िम्मेदारी समझी और कई बार भावुक भी हो जाते हैं। शायद यही उनकी अभिनय कला में भी झलकता है, जो सीधे लोगों के दिलों तक पहुँचता है।

ईशान: अपनी राह बनाने वाला मज़बूत मन
दूसरी तरफ, ईशान खट्टर (Ishaan Khatter) को लेकर माँ का मानना है कि वह कुछ मायनों में शाहिद से कहीं ज़्यादा 'स्ट्रांग' (Stronger) हैं। ईशान का संघर्ष अपनी जगह अलग रहा है। उन्होंने अपनी पहचान खुद बनाई और वे किसी भी कठिन परिस्थिति में खुद को बहुत मज़बूती से संभाल लेते हैं। उनमें एक ऐसी आंतरिक शक्ति है जो उन्हें हार मानने नहीं देती। ईशान का अपना अंदाज़ और ज़िंदगी को देखने का तरीका बहुत सुलझा हुआ है।

दोनों भाइयों का अनमोल बंधन
नीलिमा अज़ीम के इस इंटरव्यू ने एक बात साफ़ कर दी है कि भले ही इन दोनों में उम्र का फासला हो और व्यक्तित्व में अंतर हो, लेकिन इनका आपसी तालमेल लाजवाब है। वे एक-दूसरे को समझते हैं और एक-दूसरे के काम का सम्मान करते हैं। 2026 में जब आज के दौर के परिवार बिखर रहे हैं, शाहिद और ईशान जैसे भाइयों का प्यार एक मिसाल की तरह दिखता है।

इस साल जहाँ शाहिद कपूर की आने वाली फिल्मों (Shahid Kapoor upcoming movies 2026) का फैंस को बेसब्री से इंतज़ार है, वहीं ईशान खट्टर भी अपने इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स और ओटीटी से सबको इंप्रेस करने को तैयार हैं। लेकिन पर्दे से दूर, उनकी माँ के ये शब्द याद दिलाते हैं कि स्टार होने से पहले वे सिर्फ़ उनके दो बच्चे हैं।

रिश्तों की ऐसी ही प्यारी और सच्ची कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि हर इंसान की अपनी खूबियाँ और अपनी मज़बूती होती है।