AMU के अंदर ये क्या हो रहा है? जब थक-हारकर महिला प्रोफेसर ने खटखटाया विश्व हिंदू परिषद का दरवाजा

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News India Live, Digital Desk: विश्वविद्यालय यानी यूनिवर्सिटी वह जगह होती है जहाँ समाज का भविष्य गढ़ा जाता है। हम उम्मीद करते हैं कि वहाँ का माहौल सबसे सुरक्षित और सुलझा हुआ होगा। लेकिन, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से हाल ही में एक ऐसी खबर आई है, जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है।

एक महिला प्रोफेसर, जिनका काम बच्चों को पढ़ाना और राह दिखाना है, आज खुद डरी हुई हैं। और हैरानी की बात यह है कि मदद के लिए उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन या पुलिस के बजाय एक संगठन का दरवाजा खटखटाया है।

आइये जानते हैं कि आखिर माजरा क्या है और नौबत यहाँ तक क्यों पहुंची।

क्या है पूरा मामला?

खबरों के मुताबिक़, AMU की एक महिला प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि उन्हें डिपार्टमेंट में बुरी तरह से परेशान (Harass) किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह कोई एक-दो दिन की बात नहीं है, बल्कि लंबे समय से उनके साथ मानसिक प्रताड़ना हो रही है।

आमतौर पर, जब किसी कर्मचारी को दिक्कत होती है, तो वो अपने बॉस या वाइस चांसलर के पास जाता है। पीड़ित प्रोफेसर का कहना है कि उन्होंने भी ऐसा ही किया। उन्होंने अपनी परेशानी यूनिवर्सिटी के जिम्मेदार लोगों को बताई, लेकिन अफ़सोस, उन्हें वहां से कोई ठोस मदद या इंसाफ नहीं मिला।

सिस्टम से उठा भरोसा, तो VHP के पास पहुंचीं

जब इंसान चारों तरफ से घिर जाता है और उसे लगता है कि उसकी सुनवाई नहीं हो रही, तो वो हर मुमकिन रास्ता अपनाता है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित प्रोफेसर ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) से संपर्क किया।

उन्होंने वीएचपी के पदाधिकारियों से मुलाकात की और उनसे गुहार लगाई कि उनकी मदद की जाए। उनका कहना है कि डिपार्टमेंट के चेयरमैन और कुछ अन्य लोग उन्हें बेवजह टारगेट कर रहे हैं, छुट्टियां नहीं दी जा रही हैं और तरह-तरह से दबाने की कोशिश हो रही है।

यह घटना यह बताती है कि एक महिला कितनी मजबूर महसूस कर रही होगी कि उसे कैंपस के अंदर के मैकेनिज्म (शिकायत निवारण तंत्र) पर भरोसा ही नहीं रहा।

संगठन ने क्या कहा?

प्रोफेसर की शिकायत मिलने के बाद विश्व हिंदू परिषद के लोग भी एक्शन में आ गए हैं। उनका कहना है कि यह बहुत गंभीर मामला है। एक शिक्षा संस्थान में अगर एक महिला सुरक्षित महसूस नहीं कर रही और उसे न्याय के लिए बाहर आना पड़ रहा है, तो यह प्रशासन की बहुत बड़ी नाकामी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे इस मामले को उच्च अधिकारियों तक लेकर जाएंगे और प्रोफेसर को इंसाफ दिलाएंगे।

बड़े सवाल जो उठ रहे हैं

यह घटना सिर्फ एक आरोप नहीं है, बल्कि कई तीखे सवाल खड़े करती है:

  1. क्या हमारे बड़े संस्थानों में महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता?
  2. आंतरिक शिकायत समितियां (Internal Complaint Committees) सिर्फ़ कागज़ों पर हैं क्या?
  3. शिक्षा के महौल में यह "डर" और "घुटन" क्यों है?

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